नई दिल्ली,
पूर्व भारतीय राजनयिक के.पी. फेबियन ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं, के खिलाफ बढ़ती हिंसा और अस्थिरता पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि भारत को इस संवेदनशील स्थिति से निपटने के लिए कूटनीति पर निर्भर रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत “राजनयिक रूप से निष्क्रिय” नहीं रह सकता।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में फेबियन ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले कोई एक-दो घटनाएं नहीं हैं, बल्कि लगातार और बार-बार होने वाले हमले हैं। उन्होंने स्थिति को “अराजकता” करार देते हुए कहा,
“यह चौथा हमला नहीं हो सकता, हिंदुओं पर कई हमले हो चुके हैं। बांग्लादेश में अराजकता है। भारत को कूटनीति का इस्तेमाल करना होगा। मुहम्मद यूनुस तकनीकी रूप से वहां सत्ता में हैं। क्या हम उनसे बात करना बंद कर सकते हैं? नहीं। हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।”
फेबियन ने सवाल उठाया कि क्या भारत के विदेश मंत्री ने यूनुस से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा नहीं दिखता और इससे यह संकेत मिलता है कि भारत इस मुद्दे पर पर्याप्त कूटनीतिक सक्रियता नहीं दिखा रहा।
पूर्व राजनयिक की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में एक हिंदू परिधान कारखाने के सुरक्षा गार्ड बजेंद्र बिस्वास (42) की फैक्ट्री परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी नोमान मिया (29) उसी फैक्ट्री में तैनात अंसार सदस्य था और उसने ड्यूटी के दौरान सरकारी शॉटगन से फायरिंग की।
इसके अलावा, 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की मयमनसिंह में कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। 18 दिसंबर को उसकी हत्या के बाद शव को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
इस बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ढाका दौरे के दौरान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की। यह मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद हुई, जिनकी वह पुत्र हैं।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत पत्र तारिक रहमान को सौंपा और भारत सरकार व जनता की ओर से गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि खालिदा जिया की सोच और मूल्य भारत-बांग्लादेश संबंधों को आगे दिशा देते रहेंगे।
कुल मिलाकर, के.पी. फेबियन का कहना है कि बांग्लादेश में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए भारत को संवाद, कूटनीति और सतत राजनयिक हस्तक्षेप के ज़रिए अपने हितों और क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा करनी चाहिए, न कि चुप्पी साधे रहना चाहिए।






.png)