शाहरुख़ ख़ान को ‘देशद्रोही’ कहना भारत की बहुलता पर हमला: कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 02-01-2026
Calling Shah Rukh Khan a 'traitor' is an attack on India's pluralism: Congress MP Manickam Tagore
Calling Shah Rukh Khan a 'traitor' is an attack on India's pluralism: Congress MP Manickam Tagore

 

नई दिल्ली

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख़ ख़ान को ‘देशद्रोही’ कहे जाने को लेकर सियासी घमासान तेज़ हो गया है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे “भारत की बहुलतावादी संस्कृति पर सीधा हमला” करार दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर समाज में ज़हर घोलने का आरोप भी लगाया।

मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा,“सुपरस्टार शाहरुख़ ख़ान को ‘देशद्रोही’ कहना भारत की बहुलता पर हमला है। नफ़रत राष्ट्रवाद को परिभाषित नहीं कर सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समाज में ज़हर फैलाना बंद करना चाहिए।”

यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारतीय जनता पार्टी के नेता संगीत सोम ने शाहरुख़ ख़ान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शाहरुख़ को ‘देशद्रोही’ बताते हुए आरोप लगाया कि वह भारत के खिलाफ काम करने वाले देश के खिलाड़ी में निवेश कर रहे हैं। यह टिप्पणी कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्ताफ़िज़ुर रहमान को शामिल किए जाने के संदर्भ में की गई।

संगीत सोम ने एएनआई से बातचीत में कहा,
“बांग्लादेश में जिस तरह हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है, महिलाओं-बच्चियों के साथ बलात्कार हो रहे हैं, घर जलाए जा रहे हैं और भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं—इन सबके बावजूद शाहरुख़ ख़ान जैसे लोग, जिन्हें भारत ने सब कुछ दिया, ऐसे देश के खिलाड़ी में पैसा लगा रहे हैं जो भारत के खिलाफ काम कर रहा है।”
उन्होंने यहां तक दावा किया कि मुस्ताफ़िज़ुर रहमान भारत में खेल ही नहीं पाएंगे और एयरपोर्ट से बाहर भी नहीं निकल सकेंगे।

विवाद यहीं नहीं रुका। हिंदू आध्यात्मिक नेता जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने भी शाहरुख़ ख़ान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह ‘नायक नहीं’ हैं और उनके कृत्य देशद्रोह जैसे हैं। वहीं, आध्यात्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचारों का हवाला देते हुए केकेआर के फैसले की आलोचना की।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि किसी कलाकार या खिलाड़ी को उसकी धार्मिक पहचान या व्यावसायिक फैसलों के आधार पर देशद्रोही ठहराना खतरनाक प्रवृत्ति है। उनका तर्क है कि भारत की पहचान विविधता, सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों से है, न कि नफ़रत और बहिष्कार से।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह विवाद सिर्फ़ क्रिकेट या सिनेमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल को उठाता है कि राष्ट्रवाद की परिभाषा कौन तय करेगा और क्या असहमति या अलग दृष्टिकोण रखने वालों को देशद्रोही कह देना अब सामान्य होता जा रहा है।