इंदौर में डायरिया फैलने की पुष्टि: दूषित पेयजल बना बीमारी की वजह, लैब जांच में खुलासा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 02-01-2026
Diarrhea outbreak confirmed in Indore: Contaminated drinking water identified as the cause, revealed in lab tests.
Diarrhea outbreak confirmed in Indore: Contaminated drinking water identified as the cause, revealed in lab tests.

 

इंदौर

मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में डायरिया फैलने के पीछे दूषित पेयजल ही मुख्य कारण है। यह बात एक प्रयोगशाला जांच में साफ तौर पर सामने आई है। इस डायरिया प्रकोप में अब तक कम से कम चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

लैब जांच के नतीजों ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत का लगातार आठ वर्षों से सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर, पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की गंभीर खामियों से जूझ रहा है। शहर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि एक स्थानीय मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि भगीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन लीकेज के कारण पीने का पानी दूषित हो गया था, जिससे डायरिया फैला।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने जांच रिपोर्ट के विस्तृत निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि भगीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन में रिसाव पाया गया। इस स्थान के ऊपर ही एक शौचालय बना हुआ था, जिससे गंदगी पानी की लाइन में मिल गई और पूरे इलाके में संक्रमण फैल गया।

राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि भगीरथपुरा की पूरी जलापूर्ति लाइन की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी रिसाव तो नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच और मरम्मत के बाद गुरुवार से पाइपलाइन के जरिए साफ पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू कर दी गई है, लेकिन एहतियात के तौर पर लोगों को पानी उबालकर ही पीने की सलाह दी गई है। साथ ही, नए पानी के नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर संजय दुबे ने भगीरथपुरा का दौरा कर हालात की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि इस घटना से सबक लेते हुए पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, गुरुवार को भगीरथपुरा के 1,714 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 8,571 लोगों की जांच हुई। इनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।

पिछले आठ दिनों में कुल 272 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को छुट्टी दी जा चुकी है। फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 32 मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं। प्रशासन ने हालात पर नजर बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए हैं।