आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
हस्तशिल्प सहित देश का वस्त्र निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 2.1 प्रतिशत बढ़कर 3.16 लाख करोड़ रुपये हो गया। 2024-25 में यह 3.09 लाख करोड़ रुपये था। वस्त्र मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी।
यह वृद्धि उस समय हुई जब समूचे वित्त वर्ष के अधिकतर समय क्षेत्र को उसके सबसे बड़े निर्यात गंतव्य अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे शुल्क का सामना करना पड़ा।
अमेरिका ने जवाबी शुल्क व्यवस्था दो अप्रैल 2025 को 10 प्रतिशत से लागू की और यह दर निरंतर तेजी से बढ़ती गई। भारत के लिए दरें सात अगस्त 2025 तक 25 प्रतिशत और 28 अगस्त तक 50 प्रतिशत हो गईं जो फरवरी 2026 की शुरुआत तक इसी स्तर पर बनी रहीं।
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू किया। न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों पर लगाए गए व्यापक शुल्क को खारिज कर दिया था।
मंत्रालय ने कहा कि यह प्रदर्शन भारतीय वस्त्र उत्पादों की स्थिर वैश्विक मांग और प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान सालाना आधार पर 120 से अधिक गंतव्यों में निर्यात वृद्धि दर्ज की गई जो भौगोलिक विस्तार का संकेत है।
प्रमुख बाजारों में संयुक्त अरब अमीरात (22.3 प्रतिशत), ब्रिटेन (7.8 प्रतिशत), जर्मनी (9.9 प्रतिशत), स्पेन (15.5 प्रतिशत), जापान (20.6 प्रतिशत), मिस्र (38.3 प्रतिशत), नाइजीरिया (21.4 प्रतिशत), सेनेगल (54.4 प्रतिशत) और सूडान (205.6 प्रतिशत) में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
प्रमुख खंडों में सिले हुए वस्त्रों (आरएमजी) का सबसे अधिक योगदान रहा जिसका निर्यात 1.35 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.39 लाख करोड़ रुपये हो गया, यानी 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।