India's connected mobility push gains momentum as Hyundai announces 1 million connected car sales by 2027
नई दिल्ली
सरकार के व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन के प्रस्तावित फ्रेमवर्क से भारत में कनेक्टेड मोबिलिटी और सेफ्टी टेक्नोलॉजी को अपनाने की रफ़्तार बढ़ने की उम्मीद है। हुंडई मोटर इंडिया का लक्ष्य 2027 तक कुल 1 मिलियन कनेक्टेड कारों की बिक्री करना है। कंपनी की यह घोषणा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए V2V कम्युनिकेशन सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव देने वाली ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करने के कुछ दिनों बाद आई है।
हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड ने सोमवार को कहा कि उसने भारत में कुल 0.8 मिलियन कनेक्टेड कारों की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके पोर्टफोलियो में कनेक्टेड वाहनों को अपनाने की दर 2019 में 4 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 20 प्रतिशत हो गई है, जो पांच गुना वृद्धि है। यह घोषणा पिछले सप्ताह सरकार के प्रस्तावित V2V फ्रेमवर्क के संदर्भ में की गई है, जिसके तहत अक्टूबर 2028 से बनने वाले वाहनों में AIS-230 मानकों के अनुरूप V2V सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। प्रस्तावित टेक्नोलॉजी वाहनों को स्पीड, लोकेशन और दिशा जैसी रियल-टाइम जानकारी का आदान-प्रदान करने की सुविधा देगी, जिससे अचानक ब्रेक लगाने, आगे टक्कर के जोखिम, असुरक्षित लेन बदलने और पास आ रहे इमरजेंसी वाहनों के बारे में चेतावनी मिल सकेगी।
कंपनी ने 2019 में हुंडई वेन्यू (VENUE) के साथ भारत में हुंडई ब्लूलिंक (Bluelink) पेश किया था और तब से अपने कनेक्टेड-कार इकोसिस्टम का विस्तार करते हुए इसमें सुरक्षा, सिक्योरिटी और सुविधा से जुड़े 70 से अधिक फीचर्स शामिल किए हैं। इनमें रिमोट व्हीकल मॉनिटरिंग, व्हीकल हेल्थ डायग्नोस्टिक्स, लोकेशन ट्रैकिंग, ट्रिप हिस्ट्री, रिमोट कमांड, हुंडई पे (Hyundai Pay) के माध्यम से इन-कार पेमेंट, डिजिटल की (Digital Key), डिजिटल पासपोर्ट, रिमोट इमोबिलाइज़र और होम-टू-कार कनेक्टिविटी शामिल हैं।
ब्लूलिंक पांच भाषाओं में 450 से अधिक AI-पावर्ड वॉयस कमांड को भी सपोर्ट करता है, जो वाहन के मालिकाना हक और ड्राइविंग अनुभव में सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है। हुंडई ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी से सुरक्षा के लाभ भी मिले हैं, जिससे SOS और रोडसाइड असिस्टेंस सेवाओं के माध्यम से 0.5 मिलियन से अधिक वाहन चालकों को मदद मिली है। इसने लगभग 15,000 क्रैश नोटिफिकेशन मामलों में सहायता की है और वाहन का पता लगाने व उसे रिकवर करने के प्रयासों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद की है।
कार निर्माता कंपनी का लक्ष्य 2030 तक कुल 2 मिलियन कनेक्टेड कारों की बिक्री का आंकड़ा पार करना है, क्योंकि वह अपने सॉफ्टवेयर डिफाइंड व्हीकल (SDV) रोडमैप को आगे बढ़ा रही है। इसकी टेक्नोलॉजी में OTA मैप अपडेट, नेक्स्ट-जेनरेशन ऑडियो-वीडियो नेविगेशन टेलीमैटिक्स टेक्नोलॉजी और कनेक्टेड कार नेविगेशन कॉकपिट (ccNC) शामिल हैं, जिसे 2025 में कंट्रोलर OTA अपडेट क्षमता के साथ पेश किया गया था। कंपनी ने कहा कि उसकी आने वाली मास-मार्केट इलेक्ट्रिक SUV सभी वैरिएंट्स में स्टैंडर्ड तौर पर नेक्स्ट-जेनरेशन कनेक्टेड-कार टेक्नोलॉजी देगी, जिससे कनेक्टेड और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी एक-दूसरे के करीब आएंगी।
ये बदलाव भारत के ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में एक बड़े बदलाव का संकेत देते हैं—सुविधा पर केंद्रित कनेक्टेड फीचर्स से हटकर ऐसी व्हीकल कनेक्टिविटी की ओर, जो प्रोएक्टिव सेफ्टी और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट एप्लीकेशन को बेहतर ढंग से सपोर्ट कर सके।