ग्लोबल बदलावों से भारतीय बाजार को बढ़त

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 23-07-2026
India equities poised to gain from shifting global order, geopolitical realignment: Report
India equities poised to gain from shifting global order, geopolitical realignment: Report

 

नई दिल्ली
 
ICICI सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इक्विटी मार्केट को ग्लोबल इकॉनमी में हो रहे स्ट्रक्चरल बदलावों से फायदा मिलना जारी रहने की उम्मीद है। जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने, सप्लाई चेन को फिर से व्यवस्थित करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर नए सिरे से ध्यान देने से कैपिटल गुड्स, डिफेंस, एनर्जी, हेल्थकेयर और फाइनेंशियल सर्विस जैसे सेक्टर में लंबे समय के लिए मौके बन रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशक में ग्लोबल इकॉनमी का ढांचा बदला है। दुनिया बिना रोक-टोक वाले ग्लोबलाइज़ेशन के दौर से हटकर एक "नई विश्व व्यवस्था" (new world order) की ओर बढ़ रही है, जिसमें जियोपॉलिटिकल जोखिम ज़्यादा हैं और देश अपनी इकॉनमी को मज़बूत करने वाली नीतियां अपना रहे हैं।
 
इन बदलावों के बावजूद, रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ट्रेड मज़बूत बना हुआ है। इसमें कहा गया है, "GDP के मुकाबले ग्लोबल ट्रेड में बढ़ोतरी जारी है, जो 2016 में 54 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 68 प्रतिशत हो गया है।" इस मज़बूती की वजह सप्लाई चेन में विविधता, कनेक्टर देशों के ज़रिए ट्रेड का रूट बदलना, सर्विस एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी और बढ़ते द्विपक्षीय ट्रेड समझौते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में हो रहे ये बदलाव भारतीय कंपनियों के लिए निवेश के बड़े मौके पैदा कर रहे हैं।
 
रिपोर्ट में कहा गया है, "साथ ही, नई विश्व व्यवस्था की चुनौतियों के बीच, भारतीय इक्विटी मार्केट में मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, एनर्जी, डिस्क्रिशनरी कंजम्पशन (गैर-ज़रूरी चीज़ों पर खर्च), हेल्थकेयर, कमोडिटी और फाइनेंशियल सर्विस जैसे सेक्टर में ग्रोथ के मौके बन रहे हैं।" ब्रोकरेज का मानना ​​है कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत करने और ज़रूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए शुरू की गई पॉलिसी से भारत का कैपिटल एक्सपेंडिचर साइकिल (पूंजीगत खर्च का चक्र) जारी रहने की उम्मीद है।
 
रिपोर्ट में कहा गया है, "नई विश्व व्यवस्था से उभरने वाले साफ़ ट्रेंड में से एक है - एनर्जी सिक्योरिटी, डिफेंस, ज़रूरी मिनरल्स, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम सेक्टर में लोकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता स्थापित करने या भरोसेमंद सप्लाई चेन सुरक्षित करने के लिए पॉलिसी के ज़रिए बढ़ावा देना।" इसमें यह भी कहा गया है कि इस ट्रेंड से कैपिटल गुड्स कंपनियों को सबसे ज़्यादा फायदा होने की उम्मीद है।
 
रिपोर्ट में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) जैसे उभरते सेक्टर में डिमांड मज़बूत रहने की उम्मीद है, जबकि घरेलू डिस्क्रिशनरी कंजम्पशन और फाइनेंशियलाइज़ेशन से कमाई में बढ़ोतरी को और सहारा मिलने की उम्मीद है।
इसमें यह भी देखा गया कि प्री-कोविड समय के बाद से सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले भारतीय स्टॉक ज़्यादातर इन्हीं स्ट्रक्चरल थीम से जुड़े सेक्टर से आए हैं, जिनमें मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, कैपिटल गुड्स, एनर्जी, कमोडिटी और डिस्क्रिशनरी कंजम्पशन शामिल हैं, जो इन सेगमेंट के लिए लंबे समय के निवेश के मामले को और मज़बूत करते हैं।