रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किर्गिस्तान दौरे के दौरान एक अहम घोषणा की। उन्होंने बताया कि किर्गिस्तान की सेना के लिए तैयार किया गया आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। यह कदम दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करता है।
यह घोषणा बिश्केक में हुई, जहां राजनाथ सिंह शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कई देशों के रक्षा मंत्रियों से मुलाकात भी की और द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की।
इस प्रोजेक्ट के तहत किर्गिस्तान मिलिट्री इंस्टीट्यूट बिश्केक और ओश स्थित मिलिट्री यूनिट में आईटी सेंटर बनाए गए हैं। दोनों जगह 12 सेट कंप्यूटर सिस्टम लगाए गए हैं। इसके साथ ही आधुनिक वॉरगेमिंग सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल किया गया है।
भारतीय सेना के अधिकारियों के मुताबिक, सिर्फ उपकरण देना ही लक्ष्य नहीं था। वहां के सैनिकों को ट्रेनिंग भी दी गई। उन्हें काम के दौरान सिखाया गया कि इन तकनीकों का इस्तेमाल कैसे किया जाए। इससे उनकी तकनीकी क्षमता और ऑपरेशन समझने की ताकत बढ़ी है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत लगातार किर्गिस्तान के साथ अपने रक्षा संबंध मजबूत कर रहा है। इसमें ट्रेनिंग, तकनीक और संसाधनों की साझेदारी अहम भूमिका निभा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि एक और प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसमें किर्गिस्तान को कंटेनर आधारित शूटिंग रेंज दी जाएगी। इससे वहां के सैनिकों को बेहतर ट्रेनिंग मिल सकेगी।
इस दौरे के दौरान राजनाथ सिंह ने कजाकिस्तान के रक्षा मंत्री दौरेन कोसानोव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। यह बातचीत क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखकर की गई।
किर्गिस्तान के रक्षा मंत्री मुकाम्बेतोव रुसलान मुस्तफायेविच के साथ भी उनकी अलग बैठक हुई। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और किर्गिस्तान के बीच मजबूत साझेदारी है। दोनों देश लोकतंत्र, विकास और संस्कृति जैसे साझा मूल्यों से जुड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस रिश्ते को और गहरा करने को प्राथमिकता देता है।
इस मौके पर भारत ने मानवीय सहायता के तौर पर किर्गिस्तान को दो बीएचआईएसएचएम क्यूब ट्रॉमा केयर सिस्टम भी भेंट किए। यह आपात स्थिति में काम आने वाले आधुनिक चिकित्सा उपकरण हैं।
इसके अलावा राजनाथ सिंह ने बेलारूस के रक्षा मंत्री विक्टर ख्रेनिन से भी मुलाकात की। दोनों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इस बातचीत में भविष्य की साझेदारी के नए रास्तों पर विचार किया गया।
कुल मिलाकर यह दौरा भारत की विदेश और रक्षा नीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इससे साफ है कि भारत अब सिर्फ अपने देश तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत साझेदारी बना रहा है।