मैं अब चुनाव नहीं लड़ूंगा, लड़वाऊंगा: हरीश रावत

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 01-01-2026
I will not contest elections now, I will get others to contest: Harish Rawat
I will not contest elections now, I will get others to contest: Harish Rawat

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने बृहस्पतिवार को कहा कि अब वह चुनाव नहीं लड़ेंगे तथा चुनाव लड़वाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे ताकि 2027 में उनकी पार्टी की जीत सुनिश्चित हो सके।
 
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में यह भी कहा कि वह 2022 का विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ना चाहते थे, लेकिन इस बार दृढ़ हैं कि अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।
 
उत्तराखंड में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 के फरवरी-मार्च में संभावित है।
 
अगला विधानसभा चुनाव लड़ने से जुड़े सवाल पर रावत ने कहा, ‘‘मैं तो कह चुका हूं कि चुनाव लड़ाऊंगा। 2027 का विधानसभा करो या मरो का चुनाव होगा, यानी जीतो या खत्म हो जाओ। हम लगातार तीसरी बार किसी कीमत पर चुनाव नहीं हारना चाहते। इसलिए मैं चुनाव जिताने के लिए काम करूंगा।’’
 
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं 2022 में भी चुनाव नहीं लड़ना चाहता था, उस समय मना किया था। इस बार तो दृढ़ता से कहा है कि मैं चुनाव लड़ाऊंगा। महत्वपूर्ण है कि हम (70 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में) 40 की संख्या तक पहुंचें और सरकार बनाएं।’’
 
यह पूछे जाने पर कि क्या उनके चुनाव नहीं लड़ने से जनता में कांग्रेस के खिलाफ गलत संदेश नहीं जाएगा तो रावत ने कहा, ‘‘मैंने 2002 का चुनाव नहीं लड़ा था तथा सारे प्रचार अभियान का समन्वय किया था और हम जीत गए थे। 2007 में नहीं लड़ा था, तो हमने बहुत अच्छी टक्कर दी। 2012 में नहीं लड़ा था, सारा प्रचार अभियान चलाया और हम जीत गए।’’
 
उनका कहना था, ‘‘हमारे यहां प्रचार के लिए कोई चेहरा चाहिए। आज भी चेहरे के सामने चेहरे वाले चुनाव अभियान का बड़ा महत्व है।’’
 
रावत ने मुख्यमंत्री पद की अपनी दावेदारी से जुड़े सवाल पर कहा कि कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद के लिए चयन की एक प्रक्रिया है।
 
वह 2022 का विधानसभा चुनाव कुमाऊं की लालकुआं सीट से लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
 
उन्होंने उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कहा कि इस मामले में जो नए तथ्य सामने आए हैं, उसको देखते हुए अब उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच होनी चाहिए।
 
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस मामले में कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की गई है ताकि भाजपा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी की स्थिति पैदा न हो।
 
उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को मुद्दे पर कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए जरूरी है कि एसआईआर निष्पक्ष तरीके से हो।