High Court refuses to interfere with order staying disciplinary proceedings against Wankhede
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले के संबंध में आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही पर रोक लगा दी गई थी।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने स्थगन आदेश के खिलाफ केंद्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए कैट को 14 जनवरी को या अगले 10 दिन के भीतर मुख्य मामले का फैसला करने के लिए ‘‘ईमानदारी से प्रयास’’ करने को कहा।
भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 2008 बैच के अधिकारी वानखेड़े उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने 2012 में मुंबई में स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) में अपने कार्यकाल के दौरान बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को कथित तौर पर कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले में फंसाने की धमकी देकर उनके परिवार से 25 करोड़ रुपये की मांग की थी।
एनसीबी से हटाए जाने के बाद एजेंसी के कानूनी विभाग से जांच संबंधी गोपनीय जानकारी मांगने के आरोप में अपने खिलाफ अनुशासनात्मक जांच को चुनौती देते हुए वानखेड़े ने कैट के समक्ष एक मूल आवेदन दायर किया था। उन पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने एनसीबी के कानूनी अधिकारी से जांच को निर्देशित करने का आश्वासन मांगा था।
कैट ने 27 अगस्त 2025 को जांच पर रोक लगा दी थी।
केंद्र की याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘अधिकरण 14 जनवरी को या उसके बाद अगले दस दिन के भीतर मूल आवेदन का निपटारा करने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास करेगा। अधिकरण अंतरिम आदेश से अप्रभावित रहते हुए मूल आवेदन पर निर्णय लेगा।’’