नई दिल्ली
ग्लासगो में ऐतिहासिक मेडल जीतने के बाद, कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) 2026 में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह ने अपने परिवार से मिलकर गर्व महसूस किया। ग्लासगो में हुए CWG 2026 में भारतीय जूडो टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और चार मेडल जीते। इनमें एक सिल्वर मेडल, एक ब्रॉन्ज़ मेडल और हर्ष सिंह व अस्मिता डे द्वारा जीते गए दो ऐतिहासिक गोल्ड मेडल शामिल हैं। ANI से बात करते हुए हर्ष ने कहा, "मैं अपने परिवार वालों से मिलकर बहुत खुश हूँ और उन्हें मुझ पर गर्व है।" हर्ष का परिवार ने ढोल-नगाड़ों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया। हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा जूडो इवेंट में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज़ को वाज़ा-अरी (10-0) से हराकर भारत के लिए ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता।
अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने शुक्रवार को कॉमनवेल्थ गेम्स में कनाडा की हेइडी क्वाच को एक रोमांचक 'गोल्डन स्कोर' मुकाबले में हराकर इस खेल में देश का पहला CWG गोल्ड मेडल जीता। त्रिपुरा में जन्मी इस जूडो खिलाड़ी के लिए यह गोल्ड मेडल उनके शानदार सफर का बेहतरीन समापन था। इससे पहले उन्होंने सेमीफाइनल में स्कॉटलैंड की सुमेर शॉ को हराकर फाइनल में अपनी जगह बनाई थी। अस्मिता का शीर्ष तक पहुँचने का सफर हिम्मत और दृढ़ संकल्प से भरा रहा है। 22 मार्च 2003 को जन्मी अस्मिता ने आर्थिक तंगी और निजी मुश्किलों का सामना करते हुए भारतीय जूडो में अपनी पहचान बनाई। फिलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर काम कर रहीं अस्मिता ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का पहला गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है।
2026 गेम्स का आयोजन एक छोटे फॉर्मेट में किया गया था, जिसके कारण शूटिंग, रेसलिंग और बैडमिंटन जैसे भारत के लिए मेडल लाने वाले प्रमुख इवेंट्स को हटा दिया गया था। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत मेडल तालिका में चौथे स्थान पर रहा। भारत ने कुल 39 मेडल जीते, जिनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल थे। भारत ने आधिकारिक तौर पर अहमदाबाद में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी की दिशा में अपना सफ़र शुरू किया। एक शानदार समापन समारोह के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स का झंडा औपचारिक रूप से सौंपा गया; इस समारोह में ग्लासगो 2026 के समापन का जश्न मनाया गया और गेम्स के ऐतिहासिक शताब्दी संस्करण की ओर नज़र डाली गई।