गुजरात HC ने आसाराम ट्रस्ट की अपील खारिज की

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 17-04-2026
Gujarat HC Dismisses Asaram Trust's Appeal
Gujarat HC Dismisses Asaram Trust's Appeal

 

अहमदाबाद

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के आश्रम से जुड़ी उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें अहमदाबाद के मोटेरा क्षेत्र में आश्रम की जमीन को सरकार द्वारा खेल अवसंरचना के लिए अधिग्रहित करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। यह जमीन 2030कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के तहत प्रस्तावित सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के विकास के लिए उपयोग की जाएगी।

हाईकोर्ट ने माना कि संबंधित भूमि पर गंभीर उल्लंघन और अतिक्रमण किए गए हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रॉय की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट ने न केवल भूमि आवंटन और नियमितीकरण की शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि आवंटित भूखंडों के आसपास की खुली जमीन पर भी अवैध कब्जा किया।

सरकारी पक्ष के अनुसार, मोटेरा स्थित जिस भूमि पर आश्रम संचालित हो रहा है, वह लगभग 45,000वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है और इसका उपयोग अब एक बड़े खेल परिसर के विकास के लिए प्रस्तावित है। यह इलाका नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास स्थित है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि ट्रस्ट ने वर्षों से साबरमती नदी किनारे की जमीन पर भी अवैध कब्जा किया है। कोर्ट ने कहा कि इन तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता की किसी भी मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, नदी क्षेत्र की अतिक्रमित जमीन के किसी भी प्रकार के नियमितीकरण को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ बताया गया।

ट्रस्ट ने अपनी याचिका में दावा किया था कि सरकार की कार्रवाई पूर्व-नियोजित है और जमीन को खेल और संभावित ओलंपिक परियोजनाओं के लिए हासिल करने के उद्देश्य से अतिक्रमण के बहाने से लिया जा रहा है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया।

इसके अलावा अदालत ने ट्रस्ट की ओर से मांगी गई चार सप्ताह की अंतरिम रोक को भी खारिज कर दिया। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नई बेदखली नोटिस जारी किए जाएंगे, जिससे ट्रस्ट को पर्याप्त समय मिलेगा।

गौरतलब है कि आसाराम, जो वर्तमान में 84 वर्ष के हैं, को 2013 के नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके अलावा जनवरी 2023 में गांधीनगर की अदालत ने भी उन्हें एक अन्य दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी थी।