'नाट्यशास्त्र : पंचम वेद पर एकाग्र' का लोकार्पण राज्यपाल बागडे ने किया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 22-05-2026
Governor Bagde inaugurated 'Natyashastra: Concentrated on the Fifth Veda'
Governor Bagde inaugurated 'Natyashastra: Concentrated on the Fifth Veda'

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
नाट्यशास्त्र पर आधारित ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र : पंचम वेद पर एकाग्र’ का विमोचन शुक्रवार को यहां राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने किया और भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में की गई इस पहल को सराहा।
 
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला द्वारा प्रकाशित ‘नाट्यशास्त्र : पंचम वेद पर एकाग्र’ का संपादन कला मर्मज्ञ डॉ. राजेश कुमार व्यास ने किया है। इस ग्रंथ में देश के मर्मज्ञ विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में नाट्यशास्त्र के विविध आयामों पर लिखा है।
 
आधिकारिक बयान के अनुसार लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में बागडे ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर की गई इस पहल की सराहना करते हुए संपादक लेखक डॉ. राजेश कुमार व्यास को बधाई देते हुए उनकी सराहना की।
 
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में यह महत्वपूर्ण प्रकाशन है। इससे पाठकों को नाट्यशास्त्र ग्रंथ को समझने की नई और मौलिक दृष्टि मिल सकेगी।
 
उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक फुरकान खान द्वारा ग्रंथ प्रकाशन के लिए की गई पहल की भी सराहना की। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी)राजकुमार सागर भी उपस्थित रहे।
 
साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित डॉ. व्यास के अनुसार इस पुस्तक में कोलंबिया विश्वविद्यालय में संस्कृत के अतिथि आचार्य और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में कुलपति रहे डा. राधावल्लभ त्रिपाठी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और सुप्रसिद्ध नाटककार डॉ. अर्जुन देव चारण, नाट्यशास्त्र के विद्वान पीयाल भट्टाचार्य, सिनेमा-मर्मज्ञ ज्ञानेश उपाध्याय, कला मर्मज्ञ नर्मदा प्रसाद उपाध्याय व संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव सुमन कुमार सहित अन्य हस्तियों ने अपनी मौलिक दृष्टि से नाट्यशास्त्र की व्याख्या की है। पुस्तक में हजारी प्रसाद द्विवेदी और नामवर सिंह के दो दुर्लभ लेख भी हैं।
 
ग्रंथ के संपादक डॉ. व्यास देश के जाने-माने संस्कृतिकर्मी, कलाविद् और नाट्यशास्त्र के मर्मज्ञ विद्वान हैं। उनकी साहित्य की विभिन्न विधाओं में अब तक 27 मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।