नई दिल्ली
भारत सरकार ने सोमवार को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में 'ऑफ़र फ़ॉर सेल' (OFS) की घोषणा की, जिसमें प्रति शेयर फ़्लोर प्राइस (न्यूनतम कीमत) 1,400 रुपये तय की गई है। सरकार सरकारी शिपयार्ड कंपनी में 2.52 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। ओवरसब्सक्रिप्शन (मांग ज़्यादा होने) की स्थिति के लिए इसमें 'ग्रीन-शू ऑप्शन' के तहत अतिरिक्त 2.52 प्रतिशत हिस्सेदारी भी शामिल की गई है। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव ने X पर एक पोस्ट में कहा, "सरकार ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में ऑफ़र फ़ॉर सेल की घोषणा की है, जिसमें इसकी पेड-अप इक्विटी का 2.52% हिस्सा शुरुआती ऑफ़र के तौर पर और ओवरसब्सक्रिप्शन की स्थिति में अतिरिक्त 2.52% हिस्सा ग्रीन-शू ऑप्शन के तौर पर रखा गया है।"
सचिव ने आगे कहा, "फ़्लोर प्राइस 1,400 रुपये प्रति शेयर तय की गई है। OFS नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए 7 जुलाई 2026 को खुलेगा। रिटेल निवेशक 8 जुलाई 2026 को बोली लगा सकेंगे।" भारत का समुद्री क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है; यहाँ लगभग 95 प्रतिशत व्यापार (वॉल्यूम के हिसाब से) और लगभग 70 प्रतिशत व्यापार (मूल्य के हिसाब से) समुद्री मार्गों से होता है। इस क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए सरकार ने कई पहल शुरू की हैं। 25,000 करोड़ रुपये के फंड वाले 'मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड' (MDF) का मकसद शिपिंग क्षमता और जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय के लिए फ़ाइनेंसिंग उपलब्ध कराना है।
24,736 करोड़ रुपये के बजट वाली नई 'शिपबिल्डिंग फ़ाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम' (SBFAS) का मकसद घरेलू जहाज निर्माताओं को लागत के मामले में होने वाले नुकसान को कम करना और जहाज तोड़ने (शिप-ब्रेकिंग) के काम को बढ़ावा देना है। 19,989 करोड़ रुपये के बजट वाली 'शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम' (SbDS) का फ़ोकस नए जहाज निर्माण क्लस्टर विकसित करने, शिपयार्ड का विस्तार करने और रिस्क कवर (जोखिम सुरक्षा) प्रदान करने पर है।
सरकार विशाखापत्तनम में 305 करोड़ रुपये की लागत से 'इंडियन शिप टेक्नोलॉजी सेंटर' (ISTC) भी स्थापित कर रही है। यह सेंटर जहाज के डिज़ाइन, रिसर्च और डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग और स्किल डेवलपमेंट पर फ़ोकस करेगा। 'मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047' इस सेक्टर के लिए सरकार का लॉन्ग-टर्म रोडमैप है। इसमें बंदरगाहों, तटीय शिपिंग, इनलैंड वॉटरवे, जहाज निर्माण और ग्रीन शिपिंग पहलों में लगभग 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है।
इस विज़न में ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर, प्रमुख बंदरगाहों पर ग्रीन हाइड्रोजन बंकरिंग और मेथनॉल से चलने वाले जहाजों को बढ़ावा देने जैसे उपाय भी शामिल हैं। इसमें 300 से ज़्यादा ऐसी पहलें बताई गई हैं जिनका मकसद 2047 तक भारत को दुनिया के प्रमुख मैरीटाइम और जहाज निर्माण करने वाले देशों में से एक बनाना है।