Government department's plea to register FIR dismissed, magistrate's order upheld
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दिल्ली की एक अदालत ने केंद्र शासित प्रदेश सरकार के रोजगार निदेशालय द्वारा दायर उस पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें लगभग 1.94 लाख रुपये के सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी के आरोप में एक निजी कंपनी तथा उसके हस्ताक्षरकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया था।
अदालत ने कहा कि चूंकि सरकारी विभाग के पास पहले से ही सभी संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और आरोपी की पहचान हो चुकी है, इसलिए इस मामले में पुलिस जांच की आवश्यकता नहीं है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा, अगस्त 2023 के मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ विभाग द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
मजिस्ट्रेट ने धोखाधड़ी कर सरकारी धन के गबन के आरोप में कंपनी और उसके हस्ताक्षरकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया था।
शिकायत के अनुसार, विभाग ने वर्ष 2012 में अनुपयोगी वस्तुओं के लिए एक निविदा जारी की थी, जिसके बाद कंपनी ने सामान लिया और लगभग 1.94 लाख रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट जमा कराए थे।
शिकायत में कहा गया कि विभाग द्वारा ड्राफ्ट देर से जमा किए जाने के कारण वे भुनाए नहीं जा सके, और बाद में बैंक ने विभाग को सूचित किया कि कंपनी के अनुरोध पर उन्हें रद्द कर दिया गया।
दूसरी ओर, आरोपी पक्ष का कहना था कि आपूर्ति किया गया सामान निम्न स्तर का था, इसलिए विभाग को भुगतान रोक दिया गया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘निविदा प्रक्रिया से संबंधित सभी दस्तावेज विभाग के पास उपलब्ध हैं। आरोपियों को सामान सौंपने से संबंधित दस्तावेज, आरोपियों द्वारा प्रस्तुत डिमांड ड्राफ्ट की प्रति और इस संबंध में विभाग द्वारा किया गया पत्राचार, यह सब रिकॉर्ड का हिस्सा और दस्तावेज के रूप में मौजूद हैं।’’
न्यायाधीश ने कहा कि विभाग को आरोपी व्यक्तियों की जानकारी है और इस मामले में किसी ऐसी संपत्ति की बरामदगी नहीं की जानी है जिसके लिए पुलिस जांच की आवश्यकता हो।