नामांकन रद्द होने पर आयोग जाएं: अदालत

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 12-06-2026
Go to the commission if your nomination is cancelled: Court
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आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किए जाने के बाद उसके पास राहत पाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं होता।

न्यायालय ने नटराजन से यह भी पूछा कि क्या वह ऐसा कोई फैसला दिखा सकती हैं, जिसमें अदालत ने इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया हो।
 
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा, ‘‘निर्णय कितना भी त्रुटिपूर्ण क्यों न हो, एक बार नामांकन खारिज हो जाने के बाद सामान्यतः इसका उपाय कहीं और उपलब्ध होता है। क्या इस न्यायालय का ऐसा कोई निर्णय है, जिसमें हमने इस चरण में हस्तक्षेप किया हो?’’
 
नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल वही आपराधिक मामला घोषित करना होता है, जिसमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में केवल समन जारी हुए थे।
 
सिंघवी ने कहा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले का खुलासा न करने के आरोप में गलत तरीके से खारिज कर दिया।
 
राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म-26 में एक न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख नहीं किया और इस प्रकार अधूरा शपथपत्र प्रस्तुत किया।
 
मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, सत्तारूढ़ भाजपा के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की थी कि नटराजन ने अपने शपथपत्र में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले का उल्लेख नहीं किया है।