Global discussions on scientific progress viewed from a 'narrow perspective': Jaishankar
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गणित के क्षेत्र में भारतीय सभ्यता के योगदान पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि दुनिया भर में वैज्ञानिक प्रगति को लंबे समय से 'संकीर्ण नजरिए' से देखा गया और उन ऐतिहासिक विकृतियों को 'सुधारने' की आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का शीर्षक ‘शून्य से अनंत तक - गणित में भारतीय सभ्यता का योगदान’ है। इसे भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) के सहयोग से आयोजित किया गया है।
जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अपनी तरह की इस पहली ऐतिहासिक प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा, "जब हम संयुक्त राष्ट्र में एकत्रित होते हैं, तो अक्सर साझा विरासत की बात करते हैं। फिर भी यदि हम आधुनिक इतिहास के सफर को देखें, तो दुनिया भर में वैज्ञानिक प्रगति को वक्त और भूगोल की सीमाओं में बांधकर एक संकीर्ण नजरिए से देखा गया है।"
उद्घाटन समारोह में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान, प्रिंसटन विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर और फील्ड्स मेडल विजेता मंजुल भार्गव के साथ-साथ कई देशों के राजदूत और राजनयिक उपस्थित थे।
विदेश मंत्री ने कहा, "जैसे-जैसे भू-राजनीतिक बदलावों से राजनीतिक और आर्थिक पुनर्संतुलन हो रहा है, यह अनिवार्य रूप से सांस्कृतिक पुनर्संतुलन का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। यह विविध विमर्शों के लिए जगह बनाकर किया जाएगा, जिसमें हमारे अतीत की अधिक व्यापक समझ शामिल है।"