लखनऊ।
वर्ष 2025 उत्तर प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। महाकुंभ 2025 के आयोजन के साथ प्रयागराज न केवल देश, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक-आध्यात्मिक केंद्रों में से एक के रूप में उभरा। देश के कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु संगम नगरी पहुंचे और इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने काशी (वाराणसी), अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों की भी यात्रा की। इस तरह प्रयागराज से काशी, अयोध्या और मथुरा तक बना आस्था का त्रिकोण पूरे प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले गया।
महाकुंभ से पहले ही प्रयागराज धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक अहम स्थान बना चुका था और आयोजन के बाद श्रद्धालुओं का प्रवाह और तेज हो गया। मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ की घटना से कुछ दिनों के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित जरूर हुई, लेकिन आस्था का प्रवाह नहीं रुका। कुछ ही समय में हालात सामान्य हुए और इसके बाद प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के सबसे तीव्र दौर की शुरुआत हुई।
2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य सरकार ने धार्मिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता दी। मंदिरों, घाटों और तीर्थ क्षेत्रों के कायाकल्प से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती गई। 2019 में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई और 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद इसकी लोकप्रियता में अभूतपूर्व इज़ाफा हुआ। अयोध्या का दीपोत्सव, जिसने 2025 में नए विश्व रिकॉर्ड बनाए, इस आकर्षण को और मजबूत करता रहा।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद वाराणसी में भी श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई। गंगा घाटों से सीधे मंदिर तक पहुंच की सुविधा ने काशी को वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया। वहीं मथुरा-वृंदावन, भगवान कृष्ण की जन्मभूमि होने के कारण, इस आस्था सर्किट का स्वाभाविक हिस्सा बन गया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महाकुंभ के दौरान ही प्रयागराज में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। 2024 में उत्तर प्रदेश में कुल 64.91 करोड़ पर्यटक आए थे, जबकि 2025 में सिर्फ छह महीनों (जनवरी से जून) में ही 121.81 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने प्रदेश का रुख किया। इनमें विदेशी पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ी।
अयोध्या, काशी और मथुरा के अलावा देवीपाटन, विंध्यवासिनी, चित्रकूट, नैमिषारण्य और बौद्ध सर्किट के स्थलों—सारनाथ, कुशीनगर और श्रावस्ती—ने भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, आस्था कॉरिडोरों और विरासत संरक्षण अभियानों ने उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है, और आने वाले वर्षों में यह रुझान और मजबूत होने की संभावना है।






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