काठमांडू [नेपाल]
विदेश सचिव विक्रम मिसरी नेपाल की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार सुबह काठमांडू पहुंचे। विदेश सचिव त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, जहां नेपाल के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और हाल ही में नियुक्त राजदूत सुधाकर दलेला ने उनका स्वागत किया। मिसरी अपने समकक्ष अमृत बहादुर राय के निमंत्रण पर काठमांडू पहुंचे हैं। बुधवार को सचिव स्तर की एक बैठक होनी है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच नेपाली प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के संभावित एजेंडे पर चर्चा होने की उम्मीद है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ANI को बताया, "नेपाल ने इस बैठक के लिए कई एजेंडे तैयार किए हैं। इनमें नेपाली प्रधानमंत्री की भारत यात्रा और भोटेकोशी में आई बाढ़ के बाद भारत से मिलने वाली पुनर्निर्माण सहायता जैसे विषय शामिल हैं।" अधिकारी ने ANI को बताया, "बैठक के अलावा, विदेश सचिव कई मंत्रियों से शिष्टाचार मुलाकात भी करेंगे। कल (गुरुवार) अपनी यात्रा समाप्त करने से पहले, वे नेपाली प्रधानमंत्री से उनके कार्यालय में मुलाकात करेंगे।"
1989 बैच के विदेश सेवा अधिकारी मिसरी जुलाई 2024 से विदेश सचिव के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे चीन, म्यांमार और स्पेन में राजदूत रह चुके हैं और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने तीन भारतीय प्रधानमंत्रियों के निजी सचिव के रूप में भी काम किया है। उनका कार्यकाल 2026 के मध्य में बढ़ाकर जुलाई 2027 तक कर दिया गया था।
विदेश सचिव की यह यात्रा दोनों देशों के बीच चल रहे व्यावहारिक सहयोग की पृष्ठभूमि में हो रही है। अक्टूबर के अंत में, काठमांडू में नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल और भारत के सशस्त्र सीमा बल (SSB) के बीच 10वीं नेपाल-भारत समन्वय बैठक संपन्न हुई। इसमें सीमा सुरक्षा बढ़ाने, सीमा पार अपराधों के बारे में जानकारी साझा करने में सुधार करने और सीमा प्रबंधन के लिए CCTV कैमरे, स्कैनर और ड्रोन जैसी तकनीक का उपयोग करने पर सहमति बनी।
हाल ही में हुई अन्य बैठकों में ऊर्जा सहयोग (जिसमें सीमा पार ट्रांसमिशन लाइनों पर संयुक्त उपक्रम शामिल हैं) और व्यापक कनेक्टिविटी तथा व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई है। नेपाल-भारत संबंध एक खुली सीमा, लोगों के बीच व्यापक संपर्क, साझा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों, तथा व्यापार, ऊर्जा, निवेश और पारगमन (ट्रांजिट) के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण आर्थिक परस्पर निर्भरता पर आधारित हैं।
उच्च-स्तरीय संपर्क और तकनीकी बातचीत इन संबंधों का एक नियमित हिस्सा हैं। विदेश सचिवों की बैठक से इन क्षेत्रों में हुई प्रगति का आकलन करने और आगे के सहयोग के लिए नए क्षेत्रों की पहचान करने हेतु एक मंच मिलने की उम्मीद है।