Foreign institutions should join India's innovation-based education system: Dharmendra Pradhan
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नई दिल्ली, 2 मार्च। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों से भारत की तेजी से विकसित और नवाचार-आधारित शिक्षा प्रणाली के साथ सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनिश्चितताओं और तेज बदलावों से भरी दुनिया में शिक्षा समाजों के बीच सबसे मजबूत और स्थायी पुल है।
मंत्री ने यह बात ‘स्टडी इन इंडिया एजु-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026’ में कही, जिसका आयोजन शिक्षा मंत्रालय ने किया। इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और कूटनीतिक प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।
प्रधान ने कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक उज्ज्वल स्थान बना हुआ है और यहां सीखने, शोध, नवाचार और क्रियान्वयन के अपार अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि National Education Policy 2020 और ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के माध्यम से भारत छात्रों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और सतत ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत एक भरोसेमंद नवाचार साझेदार के रूप में उभर रहा है। भारत सहयोग, क्षमता निर्माण और साझा ज्ञान पर आधारित ‘ग्लोबल साउथ मॉडल’ को आगे बढ़ा रहा है।
उच्च शिक्षा सचिव Vineet Joshi ने कहा कि पिछले छह वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने उच्च शिक्षा सुधारों को स्पष्ट दिशा दी है। बहु-विषयक शिक्षा, कौशल विकास को मुख्यधारा में लाना और अंतरराष्ट्रीयकरण को मजबूत करना प्रमुख लक्ष्य रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भारतीय संस्थान संयुक्त, ड्यूल और ट्विनिंग कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक साझेदारी बढ़ा रहे हैं। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढांचा तैयार किया है, जिससे ऑस्ट्रेलिया, इटली, ब्रिटेन और अमेरिका के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के आवेदन तेजी से स्वीकृत किए जा रहे हैं।