पंचकूला (हरियाणा)
हरियाणा सरकार ने पुलिस प्रशासन को और सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के स्तर पर व्यापक फेरबदल किया है। यह प्रशासनिक पुनर्गठन अजय सिंघल के हरियाणा के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में कार्यभार संभालने के एक दिन बाद किया गया है। गृह विभाग की ओर से जारी आदेशों के तहत जेल, विजिलेंस, प्रशिक्षण और मानवाधिकार जैसे अहम विभागों में नई नियुक्तियां की गई हैं।
गृह विभाग के आधिकारिक आदेशों के अनुसार, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक मित्तल को महानिदेशक, जेल, हरियाणा नियुक्त किया गया है। वहीं 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी अरशिंदर सिंह चावला को महानिदेशक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हरियाणा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी क्रम में 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी के. एलारामचंद्रन को हरियाणा पुलिस अकादमी, मधुबन (करनाल) का निदेशक नियुक्त किया गया है। वहीं 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी डॉ. सी.एस. राव को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मानवाधिकार एवं मुकदमेबाजी) का प्रभार दिया गया है।
गौरतलब है कि आलोक मित्तल और अरशिंदर सिंह चावला, दोनों ही हरियाणा के डीजीपी पद के प्रबल दावेदारों में शामिल थे। आलोक मित्तल का नाम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा तैयार पैनल में भी था, लेकिन अंततः राज्य सरकार ने अजय सिंघल को डीजीपी नियुक्त करने का निर्णय लिया।
इससे पहले नवनियुक्त डीजीपी अजय सिंघल ने पंचकूला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उनका स्वागत किया, जबकि पुलिस बल की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
पदभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में डीजीपी अजय सिंघल ने हरियाणा पुलिस की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा,“चाहे आतंकवाद से मुकाबला हो, अपराध नियंत्रण हो या कानून-व्यवस्था बनाए रखना—हरियाणा पुलिस ने हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया है और विभिन्न मंचों पर उसकी सराहना हुई है।”
अजय सिंघल ने राज्य नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वे नायब सिंह सैनी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षाओं और सरकार के निर्देशों पर खरा उतरना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बड़ा आईपीएस फेरबदल हरियाणा में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने, जवाबदेही बढ़ाने और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।






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