Excessive dependence on AI in children has the risk of affecting their thinking ability: NK Singh
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पंद्रहवें वित्त आयोग के पूर्व चेयरमैन एन के सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) पर अत्यधिक निर्भरता से बच्चों में ‘सोचने-समझने की क्षमता’ प्रभावित होने का जोखिम पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग इस तरह किया जाना चाहिए जिससे बच्चों की रचनात्मक और स्वतंत्र रूप से सोचने की क्षमता प्रभावित न हो।
सिंह ने बच्चों को लेकर समाज की अपेक्षाओं में बदलाव की भी अपील की और माता-पिता तथा शिक्षकों से कहा कि उन्हें असफलता के लिए किसी को कलंकित नहीं करना चाहिए। असफलता सीखने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे नवोन्मेष को बढ़ावा देने के साथ-साथ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सिंह ने उद्योग मंडल सीआईआई के 10वें स्कूल शिक्षा सम्मेलन में कहा, ‘‘असफलता को स्वीकार करने की क्षमता कोई कलंक नहीं है, बल्कि सीखने की एक अवस्था है। इसके लिए सामाजिक बदलाव की जरूरत है। नवोन्मेष वास्तव में तभी आएगा जब समाज, शिक्षक और सबसे महत्वपूर्ण रूप से माता-पिता बच्चों से इस तरह की अपेक्षाएं रखने के तरीके को समझें और उसमें बदलाव लाएं।’’