EC sources say all decisions taken in unanimity, after media report cited objections to SIR decisions by two commissioners
नई दिल्ली
चुनाव आयोग के सूत्रों ने 'इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट को कम करके आंकने की कोशिश की है, जिसमें कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 'स्पेशल इंटेंसिव रेगुलेशन' (SIR) प्रक्रिया के तहत लिए गए फैसलों पर आपत्ति जताई थी। सूत्रों के मुताबिक, भारत के चुनाव आयोग के सभी फैसले - जिनमें SIR भी शामिल है - सर्वसम्मति से और दोनों चुनाव आयुक्तों तथा मुख्य चुनाव आयुक्त की मंज़ूरी से लिए गए हैं। 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, "आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई, जो उनकी जानकारी के बिना लिए या जारी किए गए थे।"
हालांकि, इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दल नाराज़ हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने बुधवार को संसद से मांग की कि वे उस प्रस्ताव (नोटिस ऑफ़ मोशन) को सामने लाएं जिस पर 60 से ज़्यादा विपक्षी राज्यसभा सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं और जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की गई है।
'एक्स' (X) पर एक पोस्ट में, जिसमें 'एक्सप्रेस' की रिपोर्ट का ज़िक्र था, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाने की अपनी मांग को फिर से दोहराया।
उन्होंने कहा, "पांच महीने पहले, 60 से ज़्यादा राज्यसभा सांसदों (50 की ज़रूरत थी) ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पेश किया था। आज आई इस बड़ी खबर के बाद कि दो चुनाव आयुक्तों ने CEC के कई कामों पर आपत्ति जताई थी, अब समय आ गया है कि राज्यसभा में उस प्रस्ताव को लाया जाए। लोकतंत्र को बचाने के लिए CEC पर महाभियोग चलाया जाए।" समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारत के सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लेने की अपील की और आरोप लगाया कि यह लोकतंत्र के साथ धोखा है।
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'एक्स' पर एक पोस्ट में, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि 'इंडियन एक्सप्रेस' की मीडिया रिपोर्ट का सीधा मतलब यह है कि सभी चुनाव आयुक्त अपने सही कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम नहीं हैं। "यह बहुत गंभीर बात है कि पिछले 10 महीनों में, 2 चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के गलत फैसलों के खिलाफ 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसका सीधा मतलब है कि सभी चुनाव आयुक्त अपने सही कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। अगर किसी स्वतंत्र संस्था के सदस्यों को सही काम करने की आज़ादी नहीं है या उनकी बात नहीं सुनी जाती है, तो ये लोकतंत्र के लिए बहुत घातक और खतरनाक हालात हैं। सत्ता में बैठे लोगों के हाथों की कठपुतली बनकर लोकतंत्र के साथ धोखा करना एक गंभीर संवैधानिक अपराध है। यह लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश से कम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को इस पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए!" उन्होंने कहा।
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच बहुमत का समर्थन हासिल नहीं है।
"ऐसा लगता है कि इस देश में कुछ लोगों की अंतरात्मा अभी भी जिंदा है... चुनाव आयोग में हो रही गड़बड़ियों को देखिए। पहले सिर्फ़ एक सदस्य होता था; अब तीन हैं। यह बात सामने आई है कि ज्ञानेश कुमार के साथ बहुमत नहीं था। वे मनमाने ढंग से काम करते थे; श्री जोशी और श्री संधू ने 14 मौकों पर उनके काम करने के तरीकों पर सवाल उठाए," उन्होंने आरोप लगाया।
UBT सांसद संजय राउत ने दावा किया कि भारत में चुनाव प्रक्रिया से समझौता किया गया है और आरोप लगाया कि भारत का चुनाव आयोग (ECI) केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है। "ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इस देश में चुनाव एक मज़ाक बन गए हैं।
ECI गृह मंत्रालय के अधीन आता है। सबसे बड़े अपराधी अमित शाह हैं। अगर प्रधानमंत्री देश को बचाना चाहते हैं, तो उन्हें अमित शाह को कैबिनेट से हटा देना चाहिए। अगर मोदी जी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो मैं राष्ट्रपति से - जो तीनों सुरक्षा बलों के प्रमुख हैं - ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपील करूंगा। अगर राष्ट्रपति भी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो सेना प्रमुख को ऐसे 'हुकुमशाहों' (तानाशाहों) से देश को बचाने के लिए आगे आना चाहिए," उन्होंने कहा।
इस रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक घमासान और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस ने आज बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि इससे वोटिंग के अधिकारों की चोरी हुई है।