हैदराबाद (तेलंगाना)
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने ‘विंग्स इंडिया 2026’ के अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, रूस और डोमिनिकन रिपब्लिक के मंत्रीस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ अहम द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत के तेजी से बढ़ते वैश्विक नागरिक उड्डयन प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए संदेश में मंत्री नायडू ने कहा कि विंग्स इंडिया 2026 में 20 देशों की भागीदारी भारत के नागरिक उड्डयन नेतृत्व पर वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की उड्डयन नीति और विजन की सराहना करते हुए कहा कि देश अब केवल एक बड़ा विमानन बाजार नहीं, बल्कि एक वैश्विक रूप से एकीकृत विमानन इकोसिस्टम बन रहा है।
मंत्री ने बताया कि द्विपक्षीय वार्ताओं के दौरान विमान निर्माण, कौशल विकास, प्रशिक्षण और सतत (सस्टेनेबल) उड्डयन को भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में साझेदारी भारत और सहयोगी देशों दोनों के लिए दीर्घकालिक लाभ लेकर आएगी।
यह बैठकें उस समय हुईं, जब नायडू ने बुधवार को बेगमपेट एयरपोर्ट पर एशिया के सबसे बड़े विमानन सम्मेलनों में से एक ‘विंग्स इंडिया 2026’ का उद्घाटन किया। यह द्विवार्षिक आयोजन 31 जनवरी तक चलेगा, जिसमें वैश्विक विमानन उद्योग से जुड़े प्रमुख नीति-निर्माता, निवेशक और उद्योग प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन समारोह में मंत्री ने कहा कि विंग्स इंडिया देश का सबसे महत्वपूर्ण नागरिक उड्डयन शिखर सम्मेलन है, जो हर दो साल में आयोजित होता है। उन्होंने इस आयोजन के लिए तेलंगाना सरकार के सहयोग की भी सराहना की।
नायडू ने बताया कि विंग्स इंडिया 2026 का विशेष फोकस भारत की उभरती विमान निर्माण क्षमता और घरेलू मांग की मजबूती को प्रदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि आने वाले 10 वर्षों में सरकार की प्राथमिकता देश के विमानन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को सशक्त बनाना है, ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके। मंत्री ने भरोसा जताया कि अगले 10-12 वर्षों में भारत वैश्विक नागरिक उड्डयन निर्यातक के रूप में भी उभर सकता है।
इस अवसर पर मंत्री ने एयर इंडिया के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए बोइंग 787-9 विमान के प्रदर्शन का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि नए विमानों की डिलीवरी से भारतीय विमानन क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
इससे पहले, नागरिक उड्डयन मंत्री ने एयरबस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर भारतीय एमएसएमई को वैश्विक विमानन आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने पर भी चर्चा की, जिससे भारत को वैश्विक विमानन निवेश और नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया गया है।




