Despite inflation pressure due to West Asia conflict, FMCG demand remains resilient: Report
मुंबई (महाराष्ट्र)
आनंद राठी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण इनपुट लागत बढ़ने के दबाव के बावजूद भारत के FMCG (तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता सामान) सेक्टर में मांग मजबूत बनी हुई है, और कई कंपनियां अपने मार्जिन को बचाने के लिए कीमतें बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि FMCG सेक्टर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में अच्छा रेवेन्यू प्रदर्शन किया। इसमें मांग के बेहतर रुझान, चुनिंदा मूल्य निर्धारण और सभी प्रोडक्ट कैटेगरी में लगातार प्रीमियमकरण (महंगे उत्पादों की बिक्री) का योगदान रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर ने वित्त वर्ष 2026 में 8 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में Q4FY26 में 11 प्रतिशत की रेवेन्यू वृद्धि दर्ज की। हालांकि कैटेगरी-विशिष्ट चुनौतियों और मौसम से जुड़ी बाधाओं के कारण कंपनियों के बीच वृद्धि अलग-अलग रही, लेकिन अधिकांश FMCG कंपनियों ने सकारात्मक टॉप-लाइन विस्तार (बिक्री में वृद्धि) की सूचना दी।
रिपोर्ट में कहा गया है, "इनपुट लागत में बढ़ोतरी के दबाव के बावजूद मांग बनी हुई है।" रिपोर्ट ने इस वृद्धि का श्रेय वॉल्यूम में सुधार (GST में कटौती से मिली मदद), वितरण नेटवर्क के विस्तार और प्रोडक्ट इनोवेशन की पहलों को दिया। अच्छी मांग की स्थितियों के बावजूद, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सेक्टर को कमोडिटी की बढ़ती कीमतों से फिर से दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण तिमाही के दौरान चुनिंदा कमोडिटी की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी हुई, जिससे कई FMCG कंपनियों को लाभप्रदता की रक्षा के लिए 3 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ानी पड़ीं।
आनंद राठी ने निकट भविष्य में मौसम से जुड़े जोखिमों को भी एक महत्वपूर्ण कारक बताया। रिपोर्ट के अनुसार, मानसून के मौसम में अल-नीनो की स्थिति बनने की उम्मीद है, जबकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2026 में सामान्य से कम मानसून का अनुमान लगाया है, जिसमें बारिश के लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) से 10 प्रतिशत कम होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि कम बारिश ग्रामीण आय और मांग को प्रभावित कर सकती है, जो FMCG खपत के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं। साथ ही, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि GST से संबंधित बदलावों के बाद वॉल्यूम के सामान्य होने से हाल की तिमाहियों में विकास की गति को बनाए रखने में मदद मिली है। इसमें कहा गया है कि जहां दूसरी तिमाही में GST से संबंधित इन्वेंट्री और मूल्य निर्धारण में बदलाव के कारण व्यवधान देखा गया था, वहीं तीसरी तिमाही में स्थिति में सुधार हुआ और चौथी तिमाही में यह पूरी तरह से सामान्य हो गई। आनंद राठी के अनुसार, हालांकि इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और मॉनसून से जुड़ी अनिश्चितताएं निकट भविष्य के लिए मुख्य चिंताएं बनी हुई हैं, लेकिन FMCG सेक्टर में मांग के रुझान मजबूत बने हुए हैं। इसे कंपनियों द्वारा वॉल्यूम में सुधार, प्रीमियम बनाने की कोशिशों और चुनिंदा प्राइसिंग फैसलों से सहारा मिल रहा है।