आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने गृह मंत्रालय की जनसांख्यिकी संबंधी समिति द्वारा विभिन्न क्षेत्रों से धर्म के आधार पर आंकड़े जुटाए जाने के दावे वाली एक खबर का हवाला देते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि सरकार के इस कदम का एजेंडा ही दुर्भावनापूर्ण है और संभव है कि रिपोर्ट भी पहले से तैयार हो।
गृह मंत्रालय ने 26 मई, 2026 को देश में अवैध आप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए 'जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्चस्तरीय समिति' का गठन किया था।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक खबर साझा करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि यह समिति पूर्वाग्रह से निहित है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस समिति का एजेंडा स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण है और उसने अपने पूर्व निर्धारित पूर्वाग्रहों को साफ तौर पर व्यक्त किया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि उसकी रिपोर्ट पहले ही तैयार की जा चुकी है।’’
रमेश ने जिस खबर को साझा किया, उसमें दावा किया गया है कि गृह मंत्रालय की अगुवाई वाली जनसांख्यिकी समिति वाहनों और संपत्ति की खरीद, स्कूलों में दाखिला, आधार तथा मतदाताओं से संबंधित आंकड़ों की जानकारी धर्म के आधार पर वर्गीकृत करना चाहती है।
खबर के अनुसार, इन आंकड़ों को हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सहित विभिन्न धार्मिक श्रेणियों के आधार पर वर्गीकृत करने के संबंध में जानकारी मांगी गई है।