CAG exposes serious deficiencies in Odisha's DMF funds meant for mining-affected areas
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने ओडिशा में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के तहत परियोजनाओं की मंजूरी और उनके क्रियान्वयन में कई खामियों को उजागर किया है।
इन फाउंडेशन का उद्देश्य राज्य के खनन प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हित एवं लाभ के लिए काम करना है।
सोमवार को ओडिशा विधानसभा में पेश की गई अपनी एक रिपोर्ट में कैग ने जांच के लिए चुने गए खनन क्षेत्रों और कार्य प्रभागों में जिला खनिज फाउंडेशन के अंशदान के आकलन, संग्रह और निगरानी में महत्वपूर्ण व्यवस्थागत कमियों को उजागर किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्धारित डीएमएफ अंशदान दरों का गलत तरीके से इस्तेमाल करने, अंतिम रॉयल्टी आकलन के बाद अंशदान का दोबारा आकलन नहीं करने और भुगतान में देरी पर ब्याज नहीं लगाने के कारण डीएमएफ के लिए होने वाले राजस्व संग्रह में काफी कमी आई।
ये अंशदान ओडिशा में खनन पट्टाधारकों द्वारा जिला खनिज फाउंडेशन को किया जाने वाला अनिवार्य वित्तीय भुगतान है।
लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, छह जिलों ने ब्याज सहित डीएमएफ अंशदान के रूप में 22,568.17 करोड़ रुपये एकत्र किए और वित्त वर्ष 2015-16 से 2023-24 के दौरान डीएमएफ कोष से 20,947.52 करोड़ रुपये की लागत वाली 17,435 परियोजनाओं को मंजूरी दी। हालांकि, इन छह में से किसी भी डीएमएफ ने परिप्रेक्ष्य योजना और मास्टर प्लान तैयार नहीं किया।