सरना संहिता की मांग फूट डालने की साजिश: वनवासी कल्याण आश्रम प्रमुख

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 22-05-2026
Demand for Sarna Code a conspiracy to create division: Vanvasi Kalyan Ashram chief
Demand for Sarna Code a conspiracy to create division: Vanvasi Kalyan Ashram chief

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने दावा किया है कि आदिवासी विश्वास प्रणालियां हिंदू और सनातन परंपराओं का हिस्सा हैं।
 
उन्होंने अलग सरना धर्म संहिता की मांग को “समाज को विभाजित करने की साजिश” बताया है और दावा किया कि यह मांग चर्च द्वारा संचालित है, न कि स्वयं आदिवासी समुदायों द्वारा।
 
सिंह ने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में आदिवासी क्षेत्रों, विशेष रूप से झारखंड में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर चिंता व्यक्त की और दावा किया कि बड़े पैमाने पर इस तरह की प्रथा अंततः देश को कमजोर कर देगी।
 
उन्होंने यह भी दावा किया कि जनजातीय विश्वास प्रणालियां हिंदू और सनातन परंपराओं का हिस्सा हैं और “मूल रूप से, दोनों एक ही हैं”।
 
झारखंड और उससे सटे राज्यों के कुछ आदिवासी समूह सरकार से आदिवासियों के लिए सरना संहिता घोषित करने की मांग कर रहे हैं, उनका दावा है कि वे हिंदू नहीं हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस मांग का समर्थन किया है।
 
कुछ वर्ग सरना संहिता और जनगणना के दौरान एक अलग “सरना” धर्म का कॉलम रखने की मांग कर रहे हैं।
 
सिंह ने दावा किया कि आदिवासी समुदाय स्वयं सरना संहिता द्वारा प्रदत्त अलग धार्मिक पहचान की मांग नहीं कर रहे हैं और आरोप लगाया कि इस तरह के आंदोलन ने 1990 के दशक के बाद चर्च के समर्थन से गति पकड़ी।
 
उन्होंने कहा, “सरना धर्म संहिता समाज को विभाजित करने की साजिश का हिस्सा है। कुछ लोग इसमें शामिल हो गए हैं, लेकिन हमारे अनुसार, यह चर्च द्वारा संचालित है। यह हिंदू या स्वयं आदिवासी समाज का आंदोलन नहीं है।”
 
उन्होंने कहा, ‘‘1990 के दशक से पहले, इस तरह की मांगें इस रूप में मौजूद नहीं थीं। 1990 के दशक के बाद, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सरना धर्म संहिता के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाना शुरू किया।”