आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दिल्ली उच्च न्यायालय कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने के खिलाफ उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने के लिए बुधवार को सहमत हो गया।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की एक अलग याचिका पर भी सुनवाई करेंगे। बोरा ने दिल्ली पुलिस के 17 अक्टूबर के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने के लिए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष मुचलका भरने को कहा गया है।
दास और रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसके तहत उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई थी। दशहरा की छुट्टियों के कारण उच्च न्यायालय इस सप्ताह बंद है।
बोरा की याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 के तहत 17 अक्टूबर को जारी नोटिस से संबंधित है। इस नोटिस में छात्र नेता को 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होकर यह बताने को कहा गया था कि ‘‘जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए’’ उन्हें एक जमानतदार के साथ 10,000 रुपये का निजी मुचलका भरने का आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए।
बीएनएसएस की धारा 126 के तहत विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट को यह विश्वसनीय जानकारी होने पर किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए मुचलका भरवाने का अधिकार है कि वह व्यक्ति शांति भंग कर सकता है, सार्वजनिक शांति में बाधा डाल सकता है या ऐसा कोई गलत काम कर सकता है जिससे शांति भंग होने की आशंका हो।