मनी लॉन्ड्रिंग केस में नयन एन. रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 15-10-2026
Delhi HC rejects Nayan N Raheja’s anticipatory bail plea in money laundering case, cites non-cooperation with ED
Delhi HC rejects Nayan N Raheja’s anticipatory bail plea in money laundering case, cites non-cooperation with ED

 

नई दिल्ली 
 
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रियल एस्टेट व्यवसायी नयन एन. रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि रहेजा 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) की दो शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं। इसके अलावा, बार-बार समन मिलने के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश न होना, उनके खिलाफ गया और उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा नहीं दी गई। जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि रहेजा कथित मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के दोषी नहीं हैं, या जमानत मिलने पर वे ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। कोर्ट ने कहा कि जांच अभी चल रही है और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कोर्ट के सामने दिए गए आश्वासनों के बावजूद, रहेजा ने जांच में सहयोग नहीं किया। कोर्ट ने माना कि ED के समन पर व्यक्तिगत रूप से पेश न होने के लिए उन्होंने जो कारण बताए, वे उचित नहीं थे।
 
ED की ओर से वकील रजत नायर, सार्थक सहगल, देवाशीष दीक्षित, आलोक दुबे, आशीर्वाद और प्रियांशु पेश हुए। यह अग्रिम जमानत याचिका 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' की धारा 482 और PMLA की धाराओं 45 व 65 के तहत दायर की गई थी। यह मामला मार्च 2022 में ED द्वारा दर्ज की गई एक ECIR से जुड़ा है। इससे पहले, 19 सितंबर 2026 को सेशन कोर्ट ने भी रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
 
हाई कोर्ट ने बताया कि ED ने अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच रहेजा को नौ समन जारी किए थे। आदेश के अनुसार, कुछ समन के जवाब में रहेजा ने कहा कि वे शहर से बाहर हैं, या फिर उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने गौर किया कि अप्रैल 2026 में एक आईपैड (iPad) जब्त किए जाने के बाद से रहेजा ED के सामने पेश नहीं हुए हैं। ED के अनुसार, उस डिवाइस में 'रहेजा डेवलपमेंट लिमिटेड' (RDL) के प्रोजेक्ट-वार विवरण थे, जिनमें लागत, खर्च और बिना बिके इन्वेंट्री (स्टॉक) की जानकारी शामिल थी। अदालत ने एक अलग रिट याचिका में रहेजा द्वारा दिए गए इस आश्वासन पर भी ध्यान दिया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे। अदालत ने पाया कि इस आश्वासन और सहयोग करने की इच्छा जताने वाले पहले के आदेश के बावजूद, अगस्त 2026 में जारी किए गए समन के जवाब में वे पेश नहीं हुए।
 
'अमानतुल्लाह खान बनाम प्रवर्तन निदेशालय' (ED) मामले में अपने पिछले फैसले का हवाला देते हुए, हाई कोर्ट ने दोहराया कि PMLA की धारा 50 के तहत समन किए गए व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से पेश होना जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी नए तथ्यों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोबारा समन कर सकती है, भले ही वह व्यक्ति पहले पेश हो चुका हो। अदालत ने रहेजा के इस तर्क को खारिज कर दिया कि ED, 'प्रेडिकेट ऑफेंस' (मूल अपराधों) से जुड़ी चार्जशीट में बताई गई रकम से ज्यादा की 'अपराध से प्राप्त रकम' (proceeds of crime) का हिसाब नहीं लगा सकती। अदालत ने कहा कि PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है और ED की जांच, मूल अपराधों की जांच से अलग है।
 
ED के अनुसार, घर खरीदारों से मिले फंड में से 1,601.63 करोड़ रुपये को दूसरी जगह डायवर्ट (हस्तांतरित) कर दिया गया था। रहेजा ने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि RDL द्वारा इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल वैध कामों के लिए किया गया था।
हाई कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत (anticipatory bail) की अर्जी पर सुनवाई के दौरान, यह तय करने के लिए कोई 'मिनी-ट्रायल' करने की जरूरत नहीं है कि कितनी रकम डायवर्ट की गई, या ये लेनदेन वैध व्यावसायिक ट्रांसफर थे या फंड का गलत तरीके से डायवर्जन। अदालत ने कहा कि ये मुद्दे अभी जांच के दायरे में हैं और इस चरण में इन्हें बिना किसी जांच-पड़ताल के सच मान लेना सही नहीं होगा।
 
ED ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि घर खरीदारों के फंड को सुनियोजित तरीके से डायवर्ट किया गया और इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने दावा किया कि रहेजा, RDL और उससे जुड़ी कंपनियों के कामकाज में शामिल थे। एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि जांच के दौरान मिले सबूतों के बारे में उनसे पूछताछ करने और 'अपराध से प्राप्त रकम' का असल में कहां इस्तेमाल हुआ, यह पता लगाने के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।
 
दूसरी ओर, रहेजा ने तर्क दिया कि वे RDL के रोजमर्रा के कामकाज या वित्तीय मामलों में शामिल नहीं थे। उन्होंने बताया कि वे नवंबर 2010 में ही कंपनी के डायरेक्टर पद से हट गए थे और उनके पास कंपनी के केवल 0.81 प्रतिशत शेयर थे। उन्होंने मूल अपराधों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही की स्थिति का भी हवाला दिया और कंपनी की परियोजनाओं तथा वित्तीय लेन-देन को लेकर ED के आरोपों पर सवाल उठाए। हाई कोर्ट को सेशन कोर्ट के उस आदेश में कोई कमी नहीं मिली, जिसमें अग्रिम जमानत खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि रहेजा PMLA की धारा 45 के तहत तय की गई दोनों शर्तों को पूरा करने में विफल रहे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियों को मामले के गुण-दोष पर उसकी राय नहीं माना जाएगा।