दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली दंगों की साज़िश के मामले में उमर खालिद की ज़मानत की तीसरी अर्ज़ी पर नोटिस जारी किया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 31-07-2026
Delhi HC issues notice on Umar Khalid's third bail plea in Delhi Riots conspiracy case
Delhi HC issues notice on Umar Khalid's third bail plea in Delhi Riots conspiracy case

 

नई दिल्ली
 
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक्टिविस्ट और JNU के पूर्व स्कॉलर उमर खालिद की अपील पर नोटिस जारी किया। यह अपील ट्रायल कोर्ट के 4 जुलाई के उस आदेश को चुनौती देती है जिसमें 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के मामले में उनकी तीसरी रेगुलर ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी गई थी। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस विकास महाजन की डिवीज़न बेंच ने खालिद की अंतरिम ज़मानत की अर्ज़ी पर भी नोटिस जारी किया और अपील व अंतरिम ज़मानत अर्ज़ी, दोनों की सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख तय की। खालिद की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट त्रिदीप पेस ने कहा कि अपील में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें उनकी तीसरी ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी गई थी।
 
दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू पेश हुए। खालिद ने सुप्रीम कोर्ट के उस कानूनी मुद्दे पर फैसले तक अंतरिम ज़मानत मांगी है कि क्या लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में देरी के कारण गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43D(5) के तहत ज़मानत देने पर लगी पाबंदियों को दरकिनार किया जा सकता है। अपनी अपील में खालिद ने तर्क दिया है कि 5 जनवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी पिछली ज़मानत अर्ज़ी खारिज किए जाने के बाद छह महीने से ज़्यादा समय बीतने के बावजूद, ट्रायल में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा है कि आरोप तय करने (framing of charges) पर बहस अभी भी चल रही है और वह सितंबर 2020 से हिरासत में हैं।
 
4 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज समीर बाजपेयी ने उमर खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम की रेगुलर ज़मानत अर्ज़ियों को खारिज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश को देखते हुए नई ज़मानत अर्ज़ियां सुनवाई योग्य नहीं थीं; उस आदेश में उन्हें अपनी ज़मानत अर्ज़ियां फिर से दाखिल करने की इजाज़त तभी दी गई थी जब अभियोजन पक्ष (prosecution) द्वारा पेश किए गए संरक्षित गवाहों (protected witnesses) से पूछताछ पूरी हो जाए या एक साल बीत जाए - इनमें से जो भी पहले हो।
 
अभियोजन पक्ष ने ज़मानत अर्ज़ियों का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश के बाद से हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया है। यह मामला फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश के संबंध में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा दर्ज FIR 59/2020 से जुड़ा है। ट्रायल अभी आरोप तय करने पर बहस के चरण में है और आरोप अभी तय नहीं किए गए हैं। खास बात यह है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सह-आरोपी शरजील इमाम की ज़मानत अर्ज़ी खारिज होने के खिलाफ़ दायर अपील को भी 27 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।