दिल्ली हाई कोर्ट ने ईशा फ़ाउंडेशन मानहानि मामले में गूगल और अन्य को 39 और वीडियो हटाने का निर्देश दिया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 31-07-2026
Delhi HC directs Google, others to remove 39 more videos in Isha Foundation defamation case
Delhi HC directs Google, others to remove 39 more videos in Isha Foundation defamation case

 

नई दिल्ली 
 
दिल्ली हाई कोर्ट ने ईशा फाउंडेशन द्वारा दायर मानहानि के मामले में Google LLC और अन्य प्रतिवादियों को 39 शॉर्ट वीडियो और पांच अंग्रेज़ी भाषा के वीडियो हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपने पहले के अंतरिम आदेश में बदलाव करते हुए यह स्पष्ट किया कि ये वीडियो भी 'हटाने के निर्देशों' (takedown directions) के दायरे में आते हैं।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने ईशा फाउंडेशन की उस अर्ज़ी को मंज़ूरी देते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें कोर्ट के 19 मार्च के आदेश में बदलाव की मांग की गई थी। 
 
19 मार्च के उस आदेश में मानहानिपूर्ण सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगाई गई थी और कुछ वीडियो व लेख हटाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने प्रतिवादी नंबर 1 और 3 को निर्देश दिया कि वे पहले के आदेश में बताए गए विवादित वीडियो और लेखों के साथ-साथ शिकायत (plaint) के पैराग्राफ 10 में उल्लिखित 39 शॉर्ट वीडियो और पांच अंग्रेज़ी भाषा के वीडियो को भी हटा दें। साथ ही, कोर्ट ने प्रतिवादी नंबर 2 और 3 पर सुनवाई की अगली तारीख तक ऐसी कोई भी मानहानिपूर्ण सामग्री बनाने, प्रकाशित करने, अपलोड करने या साझा करने पर रोक जारी रखी।
 
ईशा फाउंडेशन ने कोर्ट को बताया कि हालांकि पहले के आदेश में निषेधाज्ञा (injunction) अर्ज़ी में उल्लिखित वीडियो का ज़िक्र था, लेकिन उसमें शिकायत में सूचीबद्ध 39 शॉर्ट वीडियो और पांच अंग्रेज़ी भाषा के वीडियो को विशेष रूप से शामिल नहीं किया गया था, जबकि उनमें भी वही सामग्री थी। प्रतिवादियों ने इस अर्ज़ी का विरोध करते हुए तर्क दिया कि फाउंडेशन असल में पहले के आदेश की समीक्षा की मांग कर रहा है और अंतरिम निषेधाज्ञा के दायरे को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
 
हाई कोर्ट ने माना कि हालांकि अर्ज़ी को स्पष्टीकरण मांगने वाली अर्ज़ी बताया गया था, लेकिन असल में यह आदेश में बदलाव के लिए थी। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि अतिरिक्त वीडियो पहले से ही मूल निषेधाज्ञा अर्ज़ी से जुड़े हुए थे क्योंकि उसमें शिकायत के संबंधित हिस्से को शामिल किया गया था। कोर्ट ने कहा कि अपने पहले के आदेश को पूरी तरह से लागू करने के लिए यह बदलाव ज़रूरी था और उसने अर्ज़ी को मंज़ूरी दे दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस आदेश को 19 मार्च के आदेश के साथ पढ़ा जाए और मामले को 5 अगस्त को रोस्टर बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।