दिल्ली HC ने INA मेमोरियल की PIL खारिज की

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 30-09-2026
Delhi HC declines PIL seeking INA memorial at Red Fort, leaves petitioner free to approach Centre
Delhi HC declines PIL seeking INA memorial at Red Fort, leaves petitioner free to approach Centre

 

नई दिल्ली
 
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को लाल किले पर इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के शहीदों के लिए एक समर्पित स्मारक बनाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि स्मारक बनाने और उसके लिए ज़मीन आवंटित करने का फ़ैसला सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने याचिका के कानूनी आधार पर सवाल उठाए और कहा कि सिर्फ़ सरकार को स्मारक बनाने के प्रस्ताव को लागू करने के लिए मजबूर करने के मकसद से 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (आदेश) जारी नहीं किया जा सकता। यह याचिका वकील नवीन बामेल और मानव त्रिवेदी के ज़रिए दायर की गई थी।
 
यह PIL 'महान स्वतंत्रता सेनानी लल्टी राम ट्रस्ट' ने दायर की थी। इसमें केंद्र सरकार से मांग की गई थी कि वह भारत की आज़ादी की लड़ाई में INA के लोगों के योगदान और बलिदान को सम्मान देते हुए लाल किले पर एक स्मारक बनाने के लिए कदम उठाए।
सुनवाई के दौरान, बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से 'रिट ऑफ़ मैंडमस' की मांग करने का आधार बताने को कहा। बेंच ने यह भी सवाल किया कि जब ऐसी संरचना का निर्माण किसी लागू करने योग्य कानूनी कर्तव्य या अधिकार से जुड़ा नहीं है, तो कोर्ट सरकार को लाल किले पर ज़मीन आवंटित करने और स्मारक बनाने का निर्देश कैसे दे सकता है।
कोर्ट ने कहा, "स्मारक बनाना किसी कर्तव्य या अधिकार से जुड़ा नहीं है। हम ऐसा निर्देश कैसे दे सकते हैं?"
 
बेंच ने याचिकाकर्ता द्वारा अनुच्छेद 21 और सम्मान की अवधारणा पर निर्भर रहने पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि रिट जारी करने के लिए याचिकाकर्ता को कोई संवैधानिक आधार या मौलिक अधिकार का उल्लंघन साबित करना होगा। चीफ़ जस्टिस ने टिप्पणी की कि किसी खास व्यक्ति या समूह के सम्मान में स्मारक बनाया जाना चाहिए या नहीं, यह ऐसा मामला नहीं है जिस पर आम तौर पर रिट याचिका के ज़रिए फ़ैसला किया जा सके। याचिकाकर्ता ने 2021 में संसद में दिए गए सरकार के एक बयान का हवाला दिया था, जिसके अनुसार लाल किले पर INA शहीदों के लिए स्मारक बनाने का प्रस्ताव मंज़ूर किया गया था।
 
इसमें लाल किले का INA मुकदमों से ऐतिहासिक जुड़ाव का भी ज़िक्र किया गया और तर्क दिया गया कि मौजूदा 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस म्यूज़ियम', INA शहीदों के लिए समर्पित स्मारक से अलग है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि PIB की प्रेस रिलीज़ के ज़रिए की गई घोषणा अपने आप में कोई ऐसा अधिकार नहीं बनाती जिसे लागू कराया जा सके।
याचिका का निपटारा करते हुए, बेंच ने ट्रस्ट को इजाज़त दी कि वह संबंधित केंद्रीय मंत्रालय से संपर्क करे और ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ विस्तृत आवेदन (रिप्रेज़ेंटेशन) जमा करे।
 
कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर ऐसा आवेदन दिया जाता है, तो सक्षम अधिकारी उस पर विचार करेगा और कानून के अनुसार फ़ैसला लेगा। बेंच ने साफ़ किया कि PIL का निपटारा करते समय की गई उसकी टिप्पणियों को याचिकाकर्ता के दावों की असलियत पर कोई राय नहीं माना जाना चाहिए।