नई दिल्ली
पुलिस ने बताया कि दिल्ली की सीमापुरी इलाके में चाकू से हमला करके एक व्यक्ति की हत्या करने के मामले में, दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कड़कड़डूमा स्थित शाहदरा जिला अदालत के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय गर्ग ने मजबूत फोरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के लगातार बयानों के आधार पर, आरोपी रंजीत को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने दोषी पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे दो महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। एक आधिकारिक घोषणा के अनुसार, "एक बड़ी उपलब्धि के तहत, शाहदरा जिले के सीमापुरी पुलिस स्टेशन की टीम ने हत्या के एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराने में सफलता हासिल की है। यह मामला FIR नंबर 249/2025 (दिनांक 14.03.2025) के तहत सीमापुरी पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 109(1)/103(1) के अंतर्गत दर्ज किया गया था। दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित शाहदरा जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, संजय गर्ग की अदालत ने आरोपी रंजीत को BNS की धारा 103(1) के तहत दोषी करार दिया है। उसे आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है और 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह घटना 13 मार्च 2025 की रात को दिल्ली के कब्रिस्तान रोड पर स्थित जैन मंदिर के पास हुई थी। शिकायतकर्ता पूनम ने बताया कि आरोपी ने उनके पति, ठाकुर दास पर चाकू से हमला किया, जिससे उनकी गर्दन पर गंभीर चोटें आईं। घायल को तुरंत इलाज के लिए GTB अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान ठाकुर दास की चोटों के कारण मौत हो गई। इसके बाद, शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर 14 मार्च 2025 को सीमापुरी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। शुरुआत में यह मामला BNS की धारा 109(1) के तहत दर्ज किया गया था, लेकिन घायल की मौत के बाद इसे बदलकर BNS, 2023 की धारा 103(1) कर दिया गया।
जांच के दौरान, क्राइम टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और जरूरी जांच-पड़ताल की। इस दौरान खून से सना सूती कपड़ा बरामद किया गया, जिसे मामले में एक महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य (physical exhibit) के रूप में पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। जांच टीम ने निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अहम सबूतों को सही ढंग से इकट्ठा किया, सुरक्षित रखा और उनकी जांच करवाई। फोरेंसिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच की गई, और FSL रिपोर्ट ने फोरेंसिक निष्कर्षों की पुष्टि की, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला और मजबूत हो गया।
इस बीच, मामले की सुनवाई प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय गर्ग की अदालत में हुई।" जिला एवं सत्र न्यायाधीश, शाहदरा जिला, कड़कड़डूमा कोर्ट, दिल्ली, सत्र मामले (सेशंस केस) में। मुकदमे के दौरान, अभियोजन पक्ष के सभी मुख्य गवाहों ने अभियोजन के मामले का समर्थन किया और उनकी गवाहियों ने अदालत के सामने महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए। वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों, जिनमें FSL (फोरेंसिक साइंस लैब) की पुष्टि करने वाली रिपोर्ट भी शामिल थी, ने साक्ष्यों की कड़ी को और मजबूत किया। जांच टीम ने यह सुनिश्चित किया कि सभी महत्वपूर्ण और प्रासंगिक साक्ष्य - जैसे कि भौतिक सबूत, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान - अदालत के रिकॉर्ड में सही ढंग से शामिल किए जाएं।
अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और सामग्रियों - जिनमें अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट शामिल हैं - पर विचार करने के बाद, अदालत ने आरोपी रंजीत को हत्या के अपराध का दोषी पाया। मुकदमा पूरा होने और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों व सामग्रियों पर विचार करने के बाद, अदालत ने अपने फैसले/आदेश के जरिए आरोपी रंजीत को हत्या के अपराध के लिए दोषी ठहराया। अदालत ने आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई और 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यदि वह जुर्माना नहीं भरता है, तो दोषी को दो महीने की साधारण जेल काटनी होगी।
अदालत ने इस मामले को DLSA (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण), शाहदरा के पास भी भेजा, ताकि 'दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना' (Delhi Victim Compensation Scheme) के तहत मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जा सके। अदालत के आदेश के अनुसार, शिकायतकर्ता पूनम और मृतक के तीन नाबालिग बच्चों को पहले ही 50,000 रुपये का अंतरिम मुआवजा दिया जा चुका था।