दरगाहों पर मुल्क में अमन कायम करने की जिम्मेदारी हैः सैयद नसीरूद्दीन चिश्ती

Story by  राकेश चौरासिया | Published by  [email protected] • 1 Years ago
सैयद नसीरूद्दीन चिश्ती दरगाहों और खानकाहों के सज्जादानशीं को संबोधित करते हुए

भरुच. गुजरात के भरुच जिले के अंबेटा शरीफ में आज ऑल इंजिया सूफी सज्जादानशीं कॉउंसिल की गुजरात विंग की सभी प्रमुख दरगाहों की मीटिंग हुई, जिसमें कॉउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरूद्दीन चिश्ती साहब ने अध्यक्षता की और कहा कि मुल्क में अमन और शांति कायम करने की जिम्मेदारी देश भर की दरगाहों की है. उन्होंने कहा कि दरगाह के धर्म प्रमुखों को आगे आना होगा और देश में बढ़ रही अतिवादी सोच से अपनी युवा पीढ़ी को बचाना होगा.

उन्होंने कहा कि लोग आज खानकाह, रूहानी तालिमात, के साथ-साथ खिदमते खल्क से दूर हो चुके इस्लाजमी मकामात मुखालफिन-ए-तसब्बुफ शिद्दत पसंद हजरात के हाथों में है. लोगों तक सूफिज्म का सही मैसेज का सही तरीके से नहीं पहुंचने की वजह से देश में अतिवादी ताकतों को आगे आने का मौका मिलता है, जिस कारण से देश के नौजवानों में सूफिज्म के प्रति रुझानों में कमी हाती जा रही है. इस लिए हमें सब खानकाह से जुड़े हुए मजहबी इदारों को मजबूत करना होगा और अलग-अलग इदारों के लोगों को एक प्लेटाफार्म पर लाना होगा.

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बैठक में कई दरगाहों और खानकाहों के सज्जादानशीं शामिल हुए

सैयद नसीरूद्दीन चिश्ती ने कहा कि खानकाहों को प्रोग्राम चलाना चाहिए, ताकि अवाम को जागरूक किया जा सके और इस्लामिक मूल्यों जैसे शांति और न्याय आदि संदेशों का प्रसार किया जा सके. उन्होंने कहा कि खानकाही लोगों को आम लोगों के बीच जाकर सूफिज्म के वास्तवित संदेश बताने की सख्त जरूरत है, क्योंकि मुल्क में भाईचारा और मुल्क की तरक्की में सज्जादानशीन का किरदार अहम होता है. आज सज्जादानशीनों /दरगाहों को इंतेहा पसंद ताकतों के सामने मिलकर खड़े होने की जरूरत है. हमें अवाम को अहसास दिलाना होगा कि दुनिया में इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं है. इस्लामिक मूल्यों जैसे- अखलाक, शांति, भाईचारा, तालीम, दूसरों को सम्मान देना, इत्यादि पर बल देना होगा. जकात के पैसों से तालीम इदारा एवं हॉस्पिटल खोलना चाहिए जो समाज के काम आ सकें. उन्होंने कहा कि दरगाहों / खानकाहों को समय-समय पर भाईचारे को बढ़सवा देने के लिए प्रोग्राम का आयोजन करना चाहिए, जिसमें दूसरे मजहब के लोगों को भी बुलाया जाना चाहिए.

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने गुजरात की सभी दरगाहों से कहाः

- सूफिज्म देश में एकता का प्रतीक है, जो लोगों में भाईचारे को बढ़ावा देता है.

- सूफिज्म सांस्कृतिक विविधता को सम्मान की नजर से देखता है, साथ ही कला और संस्कृति को बढ़ावा देता है.

- सूफिज्म लोगों को वतन से मोहब्बत करना सिखाता है.

- खानकाह के दरवाजे सभी के लिए खुले होते हैं, यहां जाति एवं मजहब नहीं देखा जाता है.

- सूफिज्म लोगों को मिलकर रहना सिखाता है, ताकि मुल्क में भाईचारा एकता को बढ़ावा मिल सके.

- यह कहर के हर रूप का विरोध करता है.

- मौजूदा दौर में खानकाही एवं सज्जादानशीन को एक प्लेटफार्म पर आकर राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के के लिए काम करने की जरूरत है.

- मुल्क की हिफाजत औा तरक्की के लिए सूफिज्म के संदेशों को लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने की जरूरत है.

- दरगाहों / खानकाहों को चाहिए कि वे मस्जिदों के इमामों को निर्देश दें कि राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को और सूफिज्म को इस्लाम से जोड़कर लोगों को बताएं.