Consultative Committee of Ministry of Coal discusses commercial coal mining reforms, leveraging private sector participation
नई दिल्ली
कोयला मंत्रालय से जुड़ी सांसदों की सलाहकार समिति ने बुधवार को "कमर्शियल कोल माइनिंग रिफॉर्म्स और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने" पर चर्चा करने के लिए बैठक की। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने की। बैठक में कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, मंत्रालय और कोयला क्षेत्र की सरकारी कंपनियों (PSU) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ समिति के सदस्यों ने भी भाग लिया। अपनी शुरुआती टिप्पणी में, रेड्डी ने कहा कि कमर्शियल कोल माइनिंग (व्यावसायिक कोयला खनन) पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए कई सुधारों में से एक बेहतरीन उदाहरण है।
केंद्रीय मंत्री ने सदस्यों को बताया कि कमर्शियल कोयला खदानों की नीलामी के 14 दौर पहले ही पूरे हो चुके हैं और 15वां दौर अभी चल रहा है। रेड्डी ने कहा कि कमर्शियल कोल माइनिंग ने कोयला क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और कुशल बना दिया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया ने प्रतिस्पर्धा और निवेश को बढ़ावा देकर भारत के कोयला क्षेत्र को बदल दिया है। नीलामी प्रक्रिया का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि कोयला मंत्रालय अधिक जागरूकता और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए रोड शो और हितधारकों के साथ परामर्श आयोजित करके उद्योग निकायों और निजी कंपनियों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहा है।
सदस्यों का स्वागत करते हुए कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में देश में 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन हासिल करने में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में देश के कुल कोयला उत्पादन में कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खदानों का योगदान लगभग 20 प्रतिशत था। दत्त ने समिति को यह भी बताया कि कोयला क्षेत्र में लगातार किए जा रहे सुधारों के कारण पूरी तरह से खोजी गई खदानों (ब्लॉक) को चालू करने का समय 51 महीने से घटकर 40 महीने और आंशिक रूप से खोजी गई खदानों के लिए 66 महीने से घटकर 52 महीने हो गया है।
कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार ने "कमर्शियल कोल माइनिंग रिफॉर्म्स और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने" पर एक प्रस्तुति दी। समिति के सदस्यों ने कोयला क्षेत्र में सुधार के लिए मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की और निजी क्षेत्र की भागीदारी को और बेहतर बनाने तथा कमर्शियल माइनिंग के विकास और पर्यावरण व समुदाय से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनाने के बारे में बहुमूल्य सुझाव दिए।