क्षेत्रीय दलों को बैसाखी के तौर पर इस्तेमाल करने के शिवसेना (उबाठा) के आरोप पर कांग्रेस को आपत्ति

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-04-2026
Congress objects to Shiv Sena (Ubatha)'s allegation of using regional parties as crutches
Congress objects to Shiv Sena (Ubatha)'s allegation of using regional parties as crutches

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 कांग्रेस ने सोमवार को शिवसेना (उबाठा) के इस आरोप पर पलटवार किया कि वह क्षेत्रीय दलों को “बैसाखी” की तरह इस्तेमाल कर रही है और उन्हें विपक्षी गठबंधन में “समान भागीदार” नहीं मान रही।

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने शिवसेना (उबाठा) के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसके कार्यकारी संपादक और सांसद संजय राउत कई बार राजनीतिक नेता और पत्रकार की अपनी भूमिकाओं के बीच भ्रमित नजर आते हैं।
 
सावंत ने ‘एक्स’ पर एक कड़े बयान में कहा कि एक ओर जहां एक पत्रकार का कर्तव्य निष्पक्ष रूप से कमियों को उजागर करना होता है, वहीं दूसरी ओर एक राजनीतिक प्रवक्ता अक्सर विरोधियों को निशाना बनाता है, और इन दोनों भूमिकाओं में भ्रम होने से आपकी जवाबदेही नजरअंदाज हो जाती है।
 
उन्होंने दावा किया कि राउत को लगता है कि जो वह कहते हैं वही “अंतिम सत्य” है, और वह यह नहीं मानते कि महा विकास आघाडी (एमवीए) जैसे गठबंधन में सभी दलों की अपनी राय होती है, जिन पर घोषणा से पहले चर्चा जरूरी है।
 
सावंत ने कहा, “एकतरफा फैसले लेना और फिर कांग्रेस नेताओं की ओर देखना गठबंधन की भावना के अनुरूप नहीं है।”
 
उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसा रवैया उचित है।
 
कांग्रेस नेता ने यह दावा भी किया कि गठबंधन में समन्वय और संवाद की कमी के कारण मुंबई और चंद्रपुर के प्रमुख नगर निकायों में एमवीए सत्ता से बाहर हो गया।
 
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने शिवसेना (उबाठा) के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसके कार्यकारी संपादक और सांसद संजय राउत कई बार राजनीतिक नेता और पत्रकार की अपनी भूमिकाओं के बीच भ्रमित नजर आते हैं।
 
सावंत ने ‘एक्स’ पर एक कड़े बयान में कहा कि एक ओर जहां एक पत्रकार का कर्तव्य निष्पक्ष रूप से कमियों को उजागर करना होता है, वहीं दूसरी ओर एक राजनीतिक प्रवक्ता अक्सर विरोधियों को निशाना बनाता है, और इन दोनों भूमिकाओं में भ्रम होने से आपकी जवाबदेही नजरअंदाज हो जाती है।
 
उन्होंने दावा किया कि राउत को लगता है कि जो वह कहते हैं वही “अंतिम सत्य” है, और वह यह नहीं मानते कि महा विकास आघाडी (एमवीए) जैसे गठबंधन में सभी दलों की अपनी राय होती है, जिन पर घोषणा से पहले चर्चा जरूरी है।
 
सावंत ने कहा, “एकतरफा फैसले लेना और फिर कांग्रेस नेताओं की ओर देखना गठबंधन की भावना के अनुरूप नहीं है।”
 
उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसा रवैया उचित है।
 
कांग्रेस नेता ने यह दावा भी किया कि गठबंधन में समन्वय और संवाद की कमी के कारण मुंबई और चंद्रपुर के प्रमुख नगर निकायों में एमवीए सत्ता से बाहर हो गया।