चिली के साथ व्यापार समझौता पूरा होने के करीब; कनाडा के साथ बातचीत ने पकड़ी रफ्तार: पीयूष गोयल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 27-10-2026
Chile trade deal nearing conclusion; Canada negotiations gaining pace: Piyush Goyal
Chile trade deal nearing conclusion; Canada negotiations gaining pace: Piyush Goyal

 

द हेग [नीदरलैंड]

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि चिली के साथ भारत की व्यापार वार्ता अब अंतिम चरण में है, जबकि कनाडा के साथ बातचीत में अच्छी प्रगति हो रही है। यह सरकार के उस प्रयास को दर्शाता है, जिसका मकसद देश की व्यापारिक साझेदारियों का विस्तार करना और भारतीय वस्तुओं व सेवाओं के लिए नए बाजार खोलना है। सोमवार को नीदरलैंड की अपनी यात्रा के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, गोयल ने कहा कि कई व्यापारिक साझेदारों के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है। मेक्सिको भी एक 'अर्ली-हार्वेस्ट' (शुरुआती चरण के) समझौते को लेकर उत्सुक है, जबकि दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (SACU) के साथ बातचीत हाल ही में शुरू हुई है।
 
भारत की चल रही व्यापार वार्ताओं की स्थिति के बारे में बताते हुए गोयल ने कहा, "मुझे लगता है कि चिली के साथ समझौता लगभग पूरा होने वाला है, और कनाडा के साथ भी बहुत अच्छी प्रगति हो रही है।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के साथ बातचीत में अधिक समय लग सकता है, हालांकि भारत इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगे बताया कि यूरेशियाई क्षेत्र के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते का अभी आकलन किया जा रहा है, क्योंकि इसमें केवल वस्तुओं को शामिल किया गया है, जबकि सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है।
 
गोयल ने कहा कि भारत ऐसे व्यापार समझौते कर रहा है, जिससे घरेलू व्यवसायों को बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल सके और कपड़ा, चमड़ा, जूते-चप्पल, कृषि, समुद्री उत्पाद, ऑटो कंपोनेंट्स और प्रिसिजन इंजीनियरिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो सकें। उन्होंने कहा कि श्रम-प्रधान उद्योगों को व्यापार समझौतों के तहत कम शुल्क (ड्यूटी) का लाभ मिल सकता है। साथ ही, कृषि और समुद्री उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच मिलने से किसानों और मछली पकड़ने वाले समुदायों द्वारा उत्पादित वस्तुओं की मांग बढ़ सकती है। ऑटो कंपोनेंट्स और प्रिसिजन इंजीनियरिंग उत्पाद बनाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए भी रोजगार सृजन के अवसर पैदा हो सकते हैं।
 
मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत में आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आने की संभावना है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में नए अवसरों की तलाश कर रही हैं। 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCCs) के बारे में बात करते हुए गोयल ने कहा कि कंपनियां अब भारतीय प्रतिभाओं को विदेश भेजने के बजाय, अपना काम भारत में स्थानांतरित करने पर अधिक विचार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे व्यवसायों की लागत कम हो सकती है, जबकि भारत की विदेशी मुद्रा कमाई, कर राजस्व और घरेलू खपत में वृद्धि हो सकती है।
 
गोयल ने यह भी कहा कि सरकार ने व्यापार वार्ताओं को लेकर अपनी रणनीति को और मजबूत किया है। इसके लिए हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जा रहा है और 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) लागू किए गए हैं, ताकि संस्थागत ज्ञान को सुरक्षित रखा जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि घरेलू हितों और संवेदनाओं की रक्षा हो सके। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और व्यापार प्रतिनिधिमंडलों का विस्तार करेगा, ताकि भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजारों को तलाशने में मदद मिल सके और विदेशी व्यवसायों को देश में निवेश के अवसरों से परिचित कराया जा सके।