SIR फैसलों पर ECI के हलफनामे की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 27-10-2026
“SC will examine if ECI affidavit establishes unanimity of SIR decisions”: Former law minister Ashwini Kumar
“SC will examine if ECI affidavit establishes unanimity of SIR decisions”: Former law minister Ashwini Kumar

 

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची के SIR (विशेष पुनरीक्षण) पर ECI (चुनाव आयोग) द्वारा हलफनामा दाखिल किए जाने के बाद, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने मंगलवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यह जांचना होगा कि क्या यह हलफनामा यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। ANI से बात करते हुए, कुमार ने कहा, "हां, यह हलफनामा दाखिल किया गया है, और अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि इस हलफनामे का क्या असर होता है। विवाद का मुख्य बिंदु और लोगों के मन में जो संदेह है, वह यह है कि फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एकतरफा लिए गए थे। इस हलफनामे के जरिए, कोर्ट को यह देखना होगा कि क्या इसमें दी गई बातें यह साबित करने के लिए काफी हैं कि फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।"
 
कुमार ने कहा कि कोर्ट को यह भी जांचना होगा कि क्या दो चुनाव आयुक्तों द्वारा शुरू में जताई गई आपत्तियां वापस ले ली गई थीं या उन्हें छोड़ दिया गया था, भले ही अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हों। उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, एक बड़ा सवाल यह भी है कि भले ही फैसले अंततः सर्वसम्मति से लिए गए हों, क्या दो चुनाव आयुक्तों की शुरुआती आपत्तियां वापस ले ली गई थीं या उन्हें छोड़ दिया गया था? इस पर कोर्ट को विचार करना होगा, और विपक्षी दलों तथा याचिकाकर्ताओं को भी इस पर अपनी दलीलें देनी होंगी। तो देखते हैं कि कोर्ट क्या कहता है।"
 
फॉर्म 6 के मुद्दे पर, कुमार ने कहा कि कोर्ट को यह तय करना होगा कि क्या फॉर्म के साथ एक अतिरिक्त घोषणापत्र मांगना, नियमों में बदलाव (संशोधन) माना जाएगा।
 
उन्होंने कहा, "इसी तरह, फॉर्म 6 के मामले में, चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि इसमें कोई संशोधन नहीं किया गया है। लेकिन यह भी सच है कि फॉर्म 6 के साथ एक और घोषणापत्र के जरिए अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी। क्या यह मांग नियमों में बदलाव (संशोधन) के दायरे में आती है या नहीं, इस पर भी सुप्रीम कोर्ट को विचार करना होगा। इसलिए, मुझे लगता है कि इस पर कोई भी टिप्पणी करने से पहले हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।"
 
इस बीच, ECI के पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने कहा कि इस हलफनामे से फिर से यह स्पष्ट होता है कि आयोग निष्पक्ष रूप से काम करता है और फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। ANI से बात करते हुए, अमीन ने कहा, "27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले, चुनाव आयोग ने आज - जो कि दस्तावेज जमा करने की आखिरी तारीख थी - अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है। इस हलफनामे पर तीनों चुनाव आयुक्तों के हस्ताक्षर हैं, जो यह पुष्टि करते हैं कि आयोग निष्पक्ष रूप से काम करता है और सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।"
 
अमीन ने कहा कि आंतरिक चर्चाओं के दौरान मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि आयोग के अंतिम फैसले हमेशा सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।
उन्होंने कहा, "आंतरिक चर्चाओं के दौरान भले ही मतभेद सामने आएं, लेकिन अंतिम फैसले सामूहिक रूप से ही लिए जाते हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़ा फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था, और कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र से जुड़ा मामला एक आंतरिक विषय था, जिसे अब सुलझा लिया गया है।"
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया। इसमें बताया गया है कि 2025 और 2026 के दौरान जारी किए गए तीनों 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) आदेश, पूरे आयोग की सामूहिक सहमति से लिए गए "सर्वसम्मत फैसले" थे।
 
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के प्रशासनिक कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए अपने हलफनामे में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि ये निर्देश एकतरफा नहीं थे। आयोग ने विशेष रूप से बताया कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों SIR आदेश, इस संवैधानिक निकाय के सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से लिए गए थे।
 
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ECI ने हलफनामे में कहा, "जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है, इन 3 SIR आदेशों के जरिए 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया गया है।" आयोग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं, और वे CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।