आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (एससीबीए) को कोई एकतरफा प्रस्ताव पारित करने से रोकने से इनकार करते हुए बुधवार को कहा कि वह ‘बार’ की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि यह एसोसिएशन का आंतरिक मामला है।
पीठ ने याचिकाकर्ता से अपनी शिकायतों को लेकर एससीबीए की चुनाव समिति से संपर्क करने को कहा।
शीर्ष अदालत आशीष गोपाल गर्ग की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रति एकजुटता व्यक्त करने वाले एससीबीए के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई गई थी।
याचिका में चुनाव होने तक एससीबीए को कोई भी प्रस्ताव पारित करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
एससीबीए ने वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने की 16 जुलाई को अपील की थी। वांगचुक ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था की व्यापक स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए अनशन किया था।