ब्लू मंडे भले ही मिथक हो, लेकिन सर्दियों की उदासी हकीकत है : जाड़े में कैसे रखें खुद का ख्याल

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-01-2026
Blue Monday may be a myth, but the winter blues are real: How to take care of yourself in winter
Blue Monday may be a myth, but the winter blues are real: How to take care of yourself in winter

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 “ब्लू मंडे” को भले ही साल का सबसे उदास दिन कहा जाता रहा हो, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह महज एक मिथक है। हालांकि, सर्दियों के मौसम में उदासी, थकान और ऊर्जा की कमी जैसी भावनाएं वास्तविक हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
 
वर्ष 2005 में मनोवैज्ञानिक क्लिफ अर्नाल ने ब्रिटेन की एक ट्रेवल एजेंसी के प्रचार अभियान के दौरान “ब्लू मंडे” शब्द गढ़ा था। एक कथित वैज्ञानिक फार्मूले के आधार पर जनवरी के तीसरे सोमवार को साल का सबसे उदास दिन बताया गया। बाद में इसे खारिज कर दिया गया, लेकिन ठंडे और कम रोशनी वाले मौसम से जुड़ी मानसिक परेशानियां हकीकत हैं।
 
विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘सीजनल अफेक्टिव डिस्ऑर्डर’ (एसएडी) अवसाद का एक मान्यता प्राप्त रूप है, जो मौसम में बदलाव से जुड़ा होता है। इसके लक्षणों में थकान, चिड़चिड़ापन, भूख में बदलाव, रुचि की कमी और निराशा की भावना शामिल हैं। कनाडाई मनोवैज्ञानिक संघ के अनुसार, लगभग 15 प्रतिशत कनाडाई नागरिकों में एसएडी के कुछ लक्षण पाए जाते हैं।
 
माना जाता है कि यह समस्या सूरज की रोशनी के कम संपर्क के कारण होती है, जिससे शरीर की जैविक घड़ी यानी ‘सर्कैडियन रिद्म’ प्रभावित होती है। इससे नींद और हार्मोन के संतुलन पर असर पड़ता है।
 
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए कुछ वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय अपनाए जा सकते हैं। घर में आरामदायक माहौल बनाना, जैसे गर्म कंबल, किताब और गर्म पेय के साथ पढ़ने का कोना तैयार करना, अपनी स्वयं की देखभाल करने में मदद करता है। वर्तमान में जीने और भावनाओं को बिना सोचे-समझे स्वीकार करने की आदत भी लाभकारी है।