विस्फोट पाकिस्तानी आईएसआई की साजिश का हिस्सा लगता है: पंजाब डीजीपी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-05-2026
Blast appears to be part of a conspiracy by Pakistani ISI: Punjab DGP
Blast appears to be part of a conspiracy by Pakistani ISI: Punjab DGP

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने बुधवार को बताया कि अमृतसर के खासा में सेना छावनी की चाहरदीवारी के पास हुआ विस्फोट कम तीव्रता वाला था।

पुलिस ने बताया कि विस्फोट मंगलवार रात को हुआ और इसमें किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
 
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने बताया कि किसी भी संगठन ने विस्फोट की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस घटना के पीछे पाकिस्तान की आईएसआई का हाथ है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि चूंकि आज ऑपरेशन सिंदूर का एक वर्ष पूरा हुआ है, इसलिए यह पंजाब में अशांति फैलाने की पाकिस्तान की आईएसआई की साजिश का हिस्सा है। पंजाब राष्ट्र की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ परोक्ष युद्ध लड़ रहा है।’’
 
आईएसआई पर झूठा विमर्श गढ़ने का आरोप लगाते हुए पुलिस महानिदेशक ने कहा कि कुछ तत्व पंजाब में माहौल बिगाड़ना चाहते हैं।
 
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ तत्व पंजाब को अशांत राज्य के रूप में पेश करना चाहते हैं। पंजाब देश का सबसे शांतिपूर्ण राज्य है और यहां कोई अशांति नहीं है। मुट्ठी भर तत्व पाकिस्तानी आईएसआई के इशारे पर पंजाब में अशांति फैलाना चाहते हैं। हम ऐसे तत्वों को कुचल देंगे और उन्हें सिर उठाने का मौका नहीं देंगे।’’
 
मंगलवार रात को सुरक्षा प्रतिष्ठानों के पास हुए दो सिलसिलेवार विस्फोटों ने पंजाब को दहला दिया, जिससे दहशत फैल गई । विपक्षी दलों ने इसकी निंदा करते हुए इसे राज्य को ‘अस्थिर’ करने का प्रयास बताया।
 
पहला विस्फोट जालंधर में सीमा सुरक्षा बल के पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर रात करीब आठ बजे हुआ, जबकि दूसरा धमाका अमृतसर में रात करीब 11 बजे हुआ। दोनों घटनाओं की जांच चल रही है।
 
सेना के अधिकारियों और पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद यादव ने पत्रकारों से कहा कि उसमें सुरक्षा संबंधी आम चिंताओं की समीक्षा की गई और निर्देश जारी किए गए।
 
उन्होंने बताया कि अमृतसर पुलिस आयुक्त कार्यालय के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ भी बैठक हुई।
 
डीजीपी के अनुसार, विस्फोट की सटीक प्रकृति और उसमें इस्तेमाल किए गए उपकरण का पता फॉरेंसिक जांच के बाद ही चलेगा।