मुसलमानों, अन्य अल्पसंख्यकों खिलाफ नहीं है भाजपा: गडकरी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-04-2026
BJP is not against Muslims, other minorities: Gadkari
BJP is not against Muslims, other minorities: Gadkari

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि भाजपा के मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने का दावा पूरी तरह गलत है और पार्टी विश्व कल्याण की भारतीय परंपरा और विचार में विश्वास रखती है
 
यहां पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भाजपा न तो जातिवादी है और न ही सांप्रदायिक, लेकिन विरोधियों ने पिछले कई दशकों से इसे बदनाम करने की कोशिश की है।
 
उन्होंने कहा, “भाजपा किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। हमारी पार्टी मानती है कि लोगों की पूजा-पद्धति अलग-अलग हो सकती हैं और हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। अलग-अलग पूजा पद्धतियों के बावजूद हम सभी भारतीय हैं। हमारी संस्कृति, इतिहास और विरासत एक है।”
 
उन्होंने कहा कि यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि भाजपा किसी एक जाति की पार्टी है। उन्होंने कहा कि पार्टी को महात्मा गांधी की हत्या करने वालों से जोड़ना भी गलत है।
 
गडकरी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक साक्षात्कार का जिक्र किया, जिसमें पटकथा लेखक-गीतकार जावेद अख्तर ने उनसे पूछा था कि यदि भारत में भाजपा सत्ता में आती है तो क्या धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ जाएगी।
 
उन्होंने कहा, “वाजपेयी ने जवाब दिया था कि भारत धर्मनिरपेक्ष है और हमेशा रहेगा। यह केवल भाजपा-आरएसएस की वजह से नहीं, बल्कि बहुसंख्यक हिंदू समाज की संस्कृति, इतिहास और समावेशी परंपरा के कारण है।”
 
गडकरी ने कहा, “राष्ट्रीयत्व और भारतीयत्व ही हिंदुत्व है। हिंदू कोई जाति, पंथ या धर्म नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है, जो समावेशी है। धर्मनिरपेक्षता का वास्तविक अर्थ ‘सर्वधर्म समभाव’ है, यानी सभी धर्मों और विचारधाराओं का सम्मान होना चाहिए। भाजपा के मुसलमानों या अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने का आरोप पूरी तरह गलत है। भाजपा विश्व कल्याण की भारतीय परंपरा में विश्वास रखती है।”
 
गडकरी ने ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना के दौरान केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री के रूप में वहां के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई से हुई मुलाकात को भी याद किया।
 
उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान खामेनेई ने उनसे फारसी भाषा की उत्पत्ति के बारे में पूछा था। जब उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है, तो खामेनेई ने बताया कि फारसी की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है।