बंगाल: आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के तबादलों के खिलाफ जनहित याचिका उच्च न्यायालय में खारिज

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 31-03-2026
Bengal: PIL Challenging Transfers of IAS and IPS Officers Dismissed by High Court
Bengal: PIL Challenging Transfers of IAS and IPS Officers Dismissed by High Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग द्वारा प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को चुनौती देने के लिए दाखिल एक जनहित याचिका को मंगलवार को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहा कि कार्रवाई मनमानी थी और इससे जनहित को नुकसान हुआ।
 
निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के तुरंत बाद राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया था।
 
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि बड़े पैमाने पर किए गए इन तबादलों से राज्य के प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ेगा और निर्वाचन आयोग के आदेशों को निरस्त करने का अनुरोध किया था।
 
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों के तबादलों के लिए अपनी शक्ति का मनमाने ढंग से इस्तेमाल किया, जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक हित को कोई नुकसान पहुंचा।
 
पीठ ने कहा, ‘‘जनहित याचिका को बनाए रखने के लिए इस मूलभूत तत्व को स्थापित किये बिना, याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है।’’
 
अदालत ने कहा, ‘‘हमारी राय में, स्थानांतरण आदेशों की वैधानिकता, वैधता और औचित्य, जिनसे कोई सार्वजनिक क्षति नहीं हुई है, उनकी जनहित याचिका में पड़ताल नहीं की जा सकती।’’
 
पीठ ने रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता अर्का कुमार नाग ने कुछ वरिष्ठ नेताओं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच ‘साठगांठ’ स्थापित करने का प्रयास किया।
 
अदालत ने कहा लेकिन निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता डीएस नायडू ने दलील दी कि जिन व्यक्तियों पर मिलीभगत या दबाव की रणनीति अपनाने के आरोप लगाए गए हैं, उनमें से किसी को भी प्रतिवादी नहीं बनाया गया है।
 
पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग के खिलाफ दुर्भावना के किसी भी आरोप को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उसने टिप्पणी की कि ‘‘निरर्थक दलीलों के अलावा, इस तरह के किसी भी संबंध को स्थापित करने के लिए कोई सामग्री पेश नहीं की जा सकी’’।
 
फैसले में कहा गया कि केवल इसलिए कि निर्वाचन आयोग ने बड़ी संख्या में अधिकारियों का तबादला किया है, यह नहीं कहा जा सकता कि कार्रवाई मनमानी, आवेग में या दुर्भावनापूर्ण तरीके से की गई है, ‘‘खासकर तब जब देश भर में इसी तरह या इससे भी अधिक संख्या में अधिकारियों के तबादले/पदस्थापना हुई हों’’।
 
अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘इस प्रकार, हमें यह मानने का कोई कारण नहीं मिलता कि पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को स्थानांतरित करते समय, निर्वाचन आयोग ने किसी प्रकार का सौतेला व्यवहार किया।’’