बंगाल में बम बरामदगी केस NIA के हवाले, आतंकी एंगल की जांच शुरू

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 27-04-2026
Bengal Bomb Recovery Case Handed Over to NIA; Terror Angle Investigation Begins
Bengal Bomb Recovery Case Handed Over to NIA; Terror Angle Investigation Begins

 

नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल में भारी मात्रा में कच्चे बम (क्रूड बम) बरामद होने के मामले ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद अब इस पूरे मामले की जांच National Investigation Agency (NIA) ने अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी ने इस मामले में आतंकी साजिश की संभावना को ध्यान में रखते हुए जांच शुरू कर दी है।

गृह मंत्रालय के आदेश के बाद NIA ने सोमवार सुबह इस केस में नई एफआईआर (RC-25/2026/NIA/DLI) दर्ज की। इससे पहले 25 अप्रैल को कोलकाता पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में 79 कच्चे बम और अन्य संदिग्ध सामग्री की बरामदगी से जुड़ा है, जो एक सुनसान जगह पर जमा करके रखी गई थी।

जानकारी के मुताबिक, यह विस्फोटक सामग्री कोलकाता के भांगड़ डिवीजन के अंतर्गत उत्तर काशीपुर थाना क्षेत्र के माजेरहाट (पोइलपाड़ा) गांव में एक कब्रिस्तान के पास स्थित एक परित्यक्त मकान से बरामद की गई। पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि यहां बड़ी मात्रा में बम और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री छिपाकर रखी गई है। सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मौके से 79 गोल आकार की वस्तुएं बरामद कीं, जिन्हें जूट की रस्सियों से बांधा गया था और वे कच्चे बम होने की आशंका है।

इस मामले में प्रारंभिक एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। पुलिस को शक है कि इन बमों को अज्ञात लोगों द्वारा किसी बड़ी साजिश के तहत तैयार किया जा रहा था।

Ministry of Home Affairs (गृह मंत्रालय) ने इस मामले को गंभीर मानते हुए इसे “शेड्यूल्ड ऑफेंस” की श्रेणी में रखा है, जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो सकता है। मंत्रालय का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में विस्फोटकों का अवैध भंडारण न केवल लोगों की जान और संपत्ति के लिए खतरा था, बल्कि इसका मकसद आम नागरिकों में भय और आतंक फैलाना भी हो सकता है।

मामले की गंभीरता और संभावित बड़े नेटवर्क की आशंका को देखते हुए गृह मंत्रालय ने 25 अप्रैल की रात को ही NIA को जांच सौंपने का फैसला किया। NIA एक्ट, 2008 की धारा 6(5) और धारा 8 के तहत एजेंसी को इस मामले की व्यापक और गहन जांच करने की अनुमति दी गई है।

अब NIA इस बात की तह तक जाने की कोशिश करेगी कि इन बमों के पीछे कौन लोग शामिल हैं, उनका मकसद क्या था और क्या इसके पीछे कोई बड़ा आतंकी नेटवर्क सक्रिय है। साथ ही, यह भी जांच की जाएगी कि क्या इन विस्फोटकों का इस्तेमाल किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए किया जाना था।

यह मामला न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि यह केवल स्थानीय स्तर की साजिश थी या इसके तार किसी बड़े आतंकी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।