बांग्लादेश में अवामी लीग पर प्रतिबंध हटाने पर हो सकता है विचार: पूर्व भारतीय उच्चायुक्त वीना सिकरी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 14-02-2026
Bangladesh may consider lifting ban on Awami League: Former Indian High Commissioner Veena Sikri
Bangladesh may consider lifting ban on Awami League: Former Indian High Commissioner Veena Sikri

 

नई दिल्ली।

बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न आम चुनावों के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जारी है। इसी बीच भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी ने संकेत दिया है कि नए प्रधानमंत्री अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर सकते हैं।

एएनआई से बातचीत में वीना सिकरी ने कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद राजनीतिक समावेशन की दिशा में कदम उठाना नई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा, “अब जब नतीजे आ चुके हैं, तो संभव है कि नए प्रधानमंत्री सबसे पहले जिन मुद्दों पर विचार करें, उनमें अवामी लीग की राजनीतिक भागीदारी पर लगे प्रतिबंध को हटाना शामिल हो।”

सिकरी ने चुनावी परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए बताया कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर रही, लेकिन अंततः बीएनपी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। उन्होंने बीएनपी को इस बड़ी जीत के लिए बधाई देते हुए कहा कि इतने बड़े जनादेश के लिए सभी पक्षों को उन्हें बधाई देनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जमात-ए-इस्लामी ने पिछले वर्षों में अपने वोट बैंक को संगठित करने और मजबूत करने के लिए काफी मेहनत की थी, जिससे मुकाबला काफी करीबी रहा।उधर, शेख हसीना ने 12 फरवरी को हुए चुनावों की वैधता को औपचारिक रूप से चुनौती दी है। अवामी लीग अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री ने चुनाव को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का “शर्मनाक अध्याय” करार दिया।

एक बयान में शेख हसीना ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में प्रशासनिक हस्तक्षेप और आंकड़ों में हेरफेर हुआ। उन्होंने दावा किया कि मतदान केंद्रों पर सन्नाटा था, लेकिन मतगणना के दौरान भारी मतदान के आंकड़े सामने आए। बयान में कहा गया, “मतदाता केंद्रों पर मौजूद नहीं थे, फिर भी मतगणना टेबल पर वोट दिखाई दिए।”

उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों में असंगतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि सुबह 11 बजे तक केवल 14.96 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ था, जो दोपहर तक बढ़कर 32.88 प्रतिशत हो गया। उनके अनुसार, यह वृद्धि अवास्तविक प्रतीत होती है और इससे मतदान दर लगभग 3.8 लाख वोट प्रति मिनट के हिसाब से बढ़ने का संकेत मिलता है।बांग्लादेश की नई राजनीतिक परिस्थिति में एक ओर जहां नई सरकार के संभावित कदमों पर चर्चा तेज है, वहीं दूसरी ओर चुनावी वैधता को लेकर उठे सवाल देश की राजनीति को आने वाले दिनों में और गर्मा सकते हैं।