असम में हालिया बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की एक छह सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी टीम ने बुधवार को गोलाघाट जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। गृह मंत्रालय (एमएचए) के संयुक्त सचिव के नेतृत्व में पहुंची इस टीम ने प्रभावित इलाकों का जमीनी निरीक्षण किया और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान टीम ने बाढ़ से प्रभावित गांवों, कृषि भूमि और राहत शिविरों की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने केंद्रीय दल को बाढ़ से हुए नुकसान, राहत कार्यों की प्रगति और पुनर्वास की आवश्यकताओं से अवगत कराया। माना जा रहा है कि इस दौरे के आधार पर तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार राज्य को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर निर्णय लेगी।
असम के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केशव महंत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा भेजी गई अंतर-मंत्रालयी टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और जिला प्रशासन के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह दौरा राज्य के लिए केंद्रीय सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
महंत ने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संयुक्त सचिव के नेतृत्व में अंतर-मंत्रालयी टीम भेजी है। टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और जिला प्रशासन से विस्तृत चर्चा की। उनकी रिपोर्ट के आधार पर असम को केंद्र सरकार से आवश्यक आर्थिक सहायता मिलेगी।"
इस बीच, असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है। मंगलवार को शिवसागर जिले में डूबने से सात और लोगों की मौत होने के बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़ा। आपदा रिपोर्टिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली (DRIMS) की 28 जुलाई तक की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया सभी सात मौतें डूबने के कारण हुई हैं।
वर्तमान में शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हैं। राज्य के 21 राजस्व सर्किलों के अंतर्गत आने वाले 622 गांवों में लगभग 3,32,639 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 45,341.98 हेक्टेयर कृषि भूमि अभी भी जलमग्न है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, नुमालीगढ़ के पास बहने वाली धनसिरी नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी नदी ने अब तक अपने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार नहीं किया है।
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने प्रभावित परिवारों के लिए व्यापक राहत पैकेज की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों के पुनर्वास और उनके जीवन को सामान्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
नई राहत योजना के तहत बाढ़ में जान गंवाने वालों के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि देने के लिए अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹5 लाख की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी। इस प्रकार मृतकों के परिवारों को कुल ₹9 लाख की आर्थिक मदद मिलेगी। जो लोग 30 दिनों से अधिक समय से लापता हैं, उनके परिजनों को भी ₹4 लाख की अनुग्रह राशि देने का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार ने एक लाख से अधिक गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के रूप में ₹15,000 नकद सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही 'अरुणोदोई' योजना के लाभार्थियों को 1 अगस्त से विशेष किस्त के रूप में ₹2,500 दिए जाएंगे। यह सुविधा चराइदेव, जोरहाट, गोलाघाट और शिवसागर जिलों के लाभार्थियों को मिलेगी।
सरकार ने विद्यार्थियों के लिए भी विशेष सहायता की घोषणा की है। 1 अगस्त से बाढ़ प्रभावित जिलों के छात्रों को कक्षा और पाठ्यक्रम के अनुसार ₹1,000 से ₹5,000 तक की पुस्तक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, स्कूल यूनिफॉर्म के लिए सहायता तथा बाढ़ में खो चुके कक्षा 10 और 12 के अंकपत्र एवं प्रमाणपत्र नि:शुल्क दोबारा जारी किए जाएंगे।
असम सरकार का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार की टीम की रिपोर्ट के बाद राज्य को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है।
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