एआईटीए के अंतरिम प्रमुख चिंतन पारिख ने प्रशासक गीता मित्तल की निष्पक्षता पर सवाल उठाए

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 25-07-2026
AITA interim chief Chintan Parikh questions administrator Geeta Mittal's impartiality
AITA interim chief Chintan Parikh questions administrator Geeta Mittal's impartiality

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
भारतीय टेनिस प्रशासन के अंदर चल रही खींचतान में एक नया मोड़ आ गया है। अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के अंतरिम अध्यक्ष चिंतन पारिख ने अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन पर घोर वित्तीय गड़बड़ी और प्रक्रियात्मक पक्षपात का आरोप लगाया है, जिससे इस खेल निकाय पर दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है।
 
उनका यह बयान रविवार को होने वाली महत्वपूर्ण विशेष रूप से बुलाई गई आम बैठक (ईजीएम) से पहले आया है। इस बैठक का उद्देश्य संघ को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अनुरूप बनाने के लिए व्यापक संवैधानिक सुधारों को मंजूरी देना है।
 
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल, 2026 को 2024 के एआईटीए चुनावों के परिणामों को एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में बरकरार रखने की अनुमति दी थी, लेकिन कार्यकारी समिति को न्यायमूर्ति मित्तल की कड़ी निगरानी में रखा ताकि वह बदलाव और नियमों को फिर से लिखने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
 
पारिख ने हालांकि तर्क दिया कि प्रशासक जानबूझकर एक ऐसे कानूनी मामले को बेवजह खींच रही हैं जो पहले ही समाप्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि प्रशासक याचिकाकर्ताओं के वकील के साथ मिलकर काम कर रही हैं, जिससे इस पद की अपेक्षित निष्पक्षता से समझौता हो रहा है।
 
पारिख ने पीटीआई से कहा, ‘‘एआईटीए एक स्वायत्त संस्था है। यह अधिनियम के अनुरूप संशोधन पारित करेगी और सभी हितधारकों का ध्यान रखेगी। वह याचिकाकर्ताओं के वकील को उपस्थित रखती हैं और सभी बातों से उन्हें भी अवगत कराती हैं। असल में याचिका का निपटारा 27 अप्रैल, 2026 के अदालती आदेश से पहले ही हो चुका है। प्रशासक की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।’’
 
पारिख ने प्रशासक द्वारा चुनी गई टीम से जुड़ी ‘अत्यधिक लागत’ की कड़ी आलोचना करते हुए खुलासा किया कि रविवार को होने वाली ईजीएम के लिए चार बाहरी पर्यवेक्षकों को प्रतिदिन 12 लाख रुपये की मोटी फीस पर लाया जा रहा है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘आप समझ सकते हैं कि वह क्या कर रही हैं। पर्यवेक्षकों के लिए प्रतिदिन 12 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने बदलावों के लिए सुझाव देने के लिए अपने ‘विशेषज्ञों’ के लिए अतिरिक्त 11 लाख रुपये मांगे हैं। उन्होंने इतने सारे बदलाव सुझाए हैं जो अधिनियम और प्रावधान के खिलाफ तथा तर्कहीन हैं।’’