आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने मंगलवार को कृषि क्षेत्र में सूचना के अंतर को पाटने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शोध संस्थानों को किसानों से जोड़ने वाली व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और पूरा ध्यान किसानों को वास्तव में आवश्यक परामर्श सहायता प्रदान करने के बजाय कच्चा माल पहुंचाने पर केंद्रित हो गया है।
कृष्णन ने बताया कि वह स्वयं पंजीकृत किसान है और उन्होंने कृषि ऋण लिया हुआ है तथा उनकी मां खेती-बाड़ी का काम देखती है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए समय पर और विश्वसनीय सलाह सबसे महत्वपूर्ण चीज है और यही वह चीज है जिसे देने में व्यवस्था लगातार विफल रही है।
सचिव ने यहां एआई शिखर सम्मेलन में कहा, ‘‘किसान होने के नाते, वह हमेशा समय पर सलाह चाहते हैं। और कई लोग कहते हैं कि शोध संस्थानों को किसानों से जोड़ने वाली पुराना विस्तार नेटवर्क ध्वस्त हो चुका है। ...कई कृषि विभागों और राज्य सरकारों में, कच्चे माल को पहुंचाने पर कहीं अधिक ध्यान केंद्रित किया जाता है। किसानों को वास्तव में किस तरह की सलाह चाहिए, इस पर कम ध्यान दिया जाता है।’’
उन्होंने कहा कि किसानों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका है और अक्सर वे उन कच्चे माल और सलाह के लिए भुगतान करने को तैयार रहते हैं जिनका महत्व समझते हैं।
सचिव ने कहा कि सब्सिडी वाले कच्चे माल को अक्सर ‘कृतज्ञता के बजाय संदेह’ के साथ स्वीकार किया जाता है, एक ऐसी वास्तविकता जिसे ‘बहुत कम लोग समझते हैं।’