नई दिल्ली
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक होलोग्राम टेक्नोलॉजी की मदद से महाभारत के युद्धवीर 'अर्जुन' और 'भगवान कृष्ण' ने एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दिल्ली स्थित प्रदर्शनी हॉल में डिजिटल अवतार लिया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के 'जियो इंटेलिजेंस' पवेलियन में इस दौरान महाभारत पर आधारित एआई-जनित वेब श्रृंखला “महाभारत: एक धर्मयुद्ध” का भी प्रदर्शन किया गया। यह पूरी श्रृंखला एआई की मदद से बनाई गई है और कुछ महीनों पहले ही जियोहॉटस्टार पर 17 एपिसोड्स के साथ लॉन्च की गई थी।
पवेलियन में विशेष रूप से एक कोव-शैली की संरचना बनाई गई है, जिस पर श्रृंखला के एआई-जनित दृश्य और सामग्री प्रदर्शित की गई हैं। इसके दोनों ओर दो लंबे पारदर्शी सिलेंडर हैं, जिनके अंदर एआई के जरिए अर्जुन और कृष्ण के अवतार को प्रोजेक्ट किया गया है। हर सिलेंडर के पास कंसोल लगा है, जहां दर्शक उनसे सीधे प्रश्न पूछ सकते हैं और एआई आधारित आवाज़ के जरिए उत्तर प्राप्त कर सकते हैं।
दर्शकों के लिए कुछ लोकप्रिय प्रश्नों में शामिल हैं – "धर्म क्या है?", "हमारे अंदर सबसे बड़ा शत्रु कौन है?", "जब जीवन अन्यायपूर्ण लगे तो हमें क्या करना चाहिए?" और "मानवों के लिए सबसे बड़ा जाल क्या है?"।
भगवान कृष्ण का अवतार बांसुरी के साथ दर्शाया गया है, जिसमें उनकी कालिमा पर हल्का नीला रंग और सुनहरे वस्त्रों के साथ मोर पंख वाला मुकुट भी शामिल है। अर्जुन का अवतार सरल और गंभीर है, जिसमें सिल्वर रंग की धोती और ट्यूनिक, उनके प्रतिष्ठित धनुष के साथ दिखाई दे रहे हैं।
रिलायंस ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पवेलियन में विभिन्न उम्र के लोग आए और तकनीक के जरिए महाभारत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा, "हमने एआई की मदद से महाभारत को नया रूप दिया और इसे आधुनिक दर्शकों के लिए फिर से कल्पित किया है।"
पवेलियन में स्वास्थ्य, फैशन और अन्य क्षेत्रों में उपयोगी एआई-आधारित उपकरणों का भी प्रदर्शन किया गया।
एआई इम्पैक्ट समिट 16–20 फरवरी तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें कई वैश्विक एआई विशेषज्ञ, विश्व नेता, तकनीकी उद्योग के प्रमुख, शिक्षाविद और परोपकारी शामिल हुए। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने समिट का उद्घाटन किया, जिसमें दुनिया भर के कई प्रमुख नेता और वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रमुख उपस्थित रहे।
इस प्रकार एआई और होलोग्राम तकनीक ने भारतीय महाकाव्य महाभारत के पात्रों को डिजिटल युग में जीवंत कर दिया, जिससे युवा और बुजुर्ग दोनों ही पीढ़ियों को ऐतिहासिक कथाओं के अनुभव में नया आयाम मिला।





