After the world title, Bhagat now sets his sights on the Asian Games and Los Angeles 2028
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
डोपिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन के कारण 2024 में पेरिस पैरालंपिक खेलों में नहीं खेल पाने वाले बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत ने हाल में विश्व खिताब जीतकर अपने करियर को नहीं दिशा दी है और उनकी निगाह अब एशियाई खेलों और 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरालंपिक खेलों पर टिकी है।
विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) के डोपिंग नियमों का उल्लंघन करने के लिए 18 महीने के प्रतिबंध के बाद वापसी करते हुए भगत ने पैरा विश्व चैंपियनशिप में एसएल3 श्रेणी में अपना छठा एकल स्वर्ण पदक जीतकर खुद को साबित किया।
भगत ने इस तरह से लगातार चौथा एकल विश्व खिताब हासिल किया, लेकिन इसका भावनात्मक महत्व आंकड़ों से कहीं अधिक था।
भगत ने पीटीआई से कहा, ‘‘मुझे डेढ़ साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस कारण मैं पैरालंपिक खेलों में भाग नहीं ले पाया। उसके बाद मैंने वापसी की और फिर से विश्व चैंपियन बना। इसलिए यह पदक मेरे लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि मैंने अपने जीवन के इस दौर में कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया।’’
इस 37 वर्षीय खिलाड़ी का पैरालंपिक खेलों में पदक पक्का माना जा रहा था लेकिन प्रतिबंध लगने के कारण इन खेलों में नहीं खेल पाना एक दशक से अधिक समय तक अपनी श्रेणी में दबदबा बनाए रखने वाले खिलाड़ी के लिए करारा झटका था। कई लोगों के लिए यह अंत हो सकता था, लेकिन भगत के लिए यह एक नई शुरुआत बन गई।